H C Verma Biography Hindi: जिसने इंडिया को समझाया ‘कॉन्सैप्ट्स ऑफ फिजिक्स’

0
86

11 नवम्बर 2017 को  के मौलाना अबुल कलाम आजाद शिक्षा पुरस्कार से नवाजा जाएगा

दोस्तों आज हम एक ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहे है जिनकी वजह से न जाने कितने लोग इंजिनियर बने | बच्चे जब इंटर में पहुचते है तो उनके आँखों में कई सपने होते है और अगर उनका विषय विज्ञान होता है तो उनमे से बहुत सारे लोग इंजिनियर बनना चाहते है | लेकिन विज्ञानं की मोटी मोटी किताबो को देखकर उन्हें डर लगने लगता है | लेकिन इस शख्स के लिखे किताब ने न सिर्फ उनके सपनो को पंख दिए बल्कि इंजिनियर भी बनाया | यह आम आदमी जरुर था  लेकिन इनका हमारे दिलो में खास जगह है | जी हा हम बात कर रहे है  भौतिकी विषय के मशहूर विद्वान व शिक्षक प्रो. हरिश्चन्द्र वर्मा यानि H. C. VERMA की |

भौतिकी विषय के मशहूर विद्वान व शिक्षक प्रो. हरिश्चन्द्र वर्मा को 11 नवम्बर 2017 को  के मौलाना अबुल कलाम आजाद शिक्षा पुरस्कार से नवाजा जाएगा।  11 नवम्बर को शिक्षा दिवस समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उन्हें यह पुरस्कार देंगे। पुरस्कार के रूप में 2.50 लाख रुपए और प्रशस्ति पत्र दिये जाएंगे। ।

तो आईये जानते है उनके बारे में ………….

H C VERMA BIOGRAPHY HINDI | जीवन परिचय 

H. C. VERMA का जन्म 3 अप्रैल 1952 को बिहार राज्य के दरभंगा जिले में हुआ था |H. C. VERMA  बचपन में वे पढने में तेज नहीं थे | H C VERMA के पिताजी शिक्षक थे | प्रारम्भ में गणित और विज्ञान की शिक्षा उनके पिताजी ने ही दी  | स्कूल ले दिनों में इन्हे विज्ञान और गणित में ज्यादा रूचि नहीं थी |

IIT KANPUR में किया टॉप 

स्नातक करने के लिए H C VERMA का दाखिला पटना पटना साइंस कॉलेज में हुआ | यहाँ के फैकल्टी से प्रभावित होकर H C VERMA के मन में विज्ञान और गणित विषय में रूचि बढ़ी | उनकी रूचि ऐसी बढ़ी की हाई स्कूल की परीक्षा में संघर्ष करने वाले लड़के ने पटना विश्वविद्यालय के Bsc Physics (Hounrs) में तीसरा स्थान ला दिया | स्नातक कम्पलीट करने के बाद H C VERMA ने GATE की परीक्षा निकाली और IIT KANPUR  से  MSC के लिए दाखिला लिया |  IIT KANPUR में H C VERMA ने सभी लडको में टॉप किया और 10.0 में से 9.9 GPA हासिल किया | उसके बाद उन्होंने IIT KANPUR से ही डॉक्टरेट  की पढाई की और तीन वर्षो से भी कम समय में पीएचडी  की उपाधि प्राप्त की |

अमेरिका से आया प्रोफेसर बनने का न्योता

IIT KANPUR में इस असाधारण प्रतिभा प्रदर्शन के कारन इन्हे अमेरिका में प्रोफेसर बनकर पढ़ने का ऑफर भी आया लेकिन इन्होने उसको अस्वीकार कर दिया | इन्होने अपने जड़ को नहीं भुला और 1980 में पटना साइंस कलेज में प्रोफेसर के रूप में ज्वाइन किया |

बच्चों की समस्याओ को समझा 

सायंस कॉलेज में बच्चो को पढ़ते हुए इन्होने देखा की बच्चे भौतिक विज्ञान की पढाई का आनंद नहीं ले रहे है बलि पढ़ पढ़ कर उब रहे है | जितना एक्सपेरिमेंट H C VERMA  ने अपने पढाई के दिनों में फिजिक्स के किताबो (फिक्स्डमेंटल ऑफ़ फिजिक्स रेस्निक और हॉलिडे, जिन्होंने उन्हें एम.एस.सी. के दौरान पढ़ा था) के साथ किया था उतना एक्सपेरिमेंट तेज विद्यार्थी  भी नहीं कर रहे थे | इसका कारण भाषा और सांस्कृतिक अंतर था | ग्रामीण पृष्ठभूमि के लोग पुस्तक की भाषा में उलझ कर रह जाते थे और वे उसकी अवधारणा और निष्कर्ष तक पहुचने से पहले ही अपनी रूचि खो बैठते थे |

8 साल तक कठिन परिश्रम से लिखी पुस्तक

एन सभी समस्याओ को दूर करने के लिए H C VERMA ने एक किताब लिखने की सोची जो भाषा के इस कठिनाई को आसान कर सके | इसके लिए उन्होंने 8 साल तक कठिन परिश्रम किया और फल क्र रूप में लोगो के बिच आया  “Concepts of Physics” | यह पुस्तक भौतिक विज्ञानं की सुन्दरता की उजागर करने में सफल रही | इस पुस्तक की सफलता का कारण  था इसकी सरल भाषा ,दिचास्प संख्यात्मक उदाहरण और भारतीय संस्कृति के साथ सम्बन्ध | यह पुस्तक आईआईटी-जेईई (संयुक्त प्रवेश परीक्षा) की तैयारी के लगभग सभी छात्रों द्वारा उपयोग की जाती है। यह H C VERMA द्वारा  भारतीय छात्रों, विज्ञान और समाज को दिए गए एक महान उपहार था । आईआईटी कानपुर आने से पहले वह लगभग 15 वर्षों तक पटना विज्ञान महाविद्यालय में रहे।

38 सालो तक सिखया लोगो को फिजिक्स 

डॉ एच सी वर्मा 1994 में सहायक प्रोफेसर के रूप में आईआईटी कानपुर में शामिल हुए। यहां, उन्होंने कई पाठ्यक्रमों के छात्रो को पढाया  और  “क्वांटम फिजिक्स” नामक एक पुस्तक भी लिखा | डॉ एच सी वर्मा ने प्रयोगात्मक परमाणु भौतिकी में अनुसंधान भी किया। आईआईटी कानपुर में  नियमित कार्य के अलावा, उन्होंने शिक्षा और समाज के लाभ के लिए कई सामाजिक-शैक्षिक पहल भी  की। इनमें से कुछ पहलुओं में स्कूल फिजिक्स परियोजना, शिक्षा सोपान शामिल हैं। उन्होंने 30 जून 2017 को औपचारिक रिटायरमेंट की घोषणा की | वे 38 सालो से लोगो को फिजिक्स की बारीकियो को समझा रहे थे |

आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर हरीश चंद्र वर्मा का कहना था साइंटिस्ट दुनिया को समझते हैं, इंजीनियर नई दुनिया बनाते हैं | दुनिया जैसी है साइंटिस्ट उसे उसी तरह समझते हैं, लेकिन इंजीनियर्स ऐसी दुनिया बनाते हैं जो पहले कभी नहीं थी.

फिजिक्स की दुनिया के भगवान 

उनके बारे में लोग कहते है की  है प्रोफेसर फिजिक्स में इतना खोए रहते थे कि क्लास में लुंगी ही पहन कर पढ़ाने चले आते थे | उनकी हाथो  में कोई किताब नहीं , साधारण कपडे और चेहरे पर मोटे लेंस का चश्मा होता था |उनके बारे में लोग यहाँ तक कहते है की  2000 के दशक में दो ही भगवान माने जाते थे एक क्रिकेट की दुनिया में  सचिन तेंदुलकर और फिजिक्स की दुनिया में प्रोफेसर एचसी वर्मा |

बनाया 300 क्लास रूम एक्सपेरिमेंट

फिजिक्स की पढ़ाई आसान बनाने के लिए आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिक प्रो. एचसी वर्मा ने घरेलू, दैनिक जीवन में प्रयोग आने वाले 300 क्लास रूम एक्सपेरिमेंट बनाए हैं। इनकी मदद से फिजिक्स पढ़ना-लिखना-समझना आसान हो जाएगा। ये एक्सपेरिमेंट बेलन, चमटा, कल्छुल, गिलास सहित तमाम घरेलू सामान से बनाए गए हैं, जो मेकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, माडर्न साइंस के उदाहरण को सरल बनाने में कारगर साबित हुए हैं।

अबुल कलाम आजाद शिक्षा पुरस्कार से नवाजा जाएगा

भौतिकी विषय के मशहूर विद्वान व शिक्षक प्रो. हरिश्चन्द्र वर्मा को 11 नवम्बर 2017 को  के मौलाना अबुल कलाम आजाद शिक्षा पुरस्कार से नवाजा जाएगा।  11 नवम्बर को शिक्षा दिवस समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उन्हें यह पुरस्कार देंगे। पुरस्कार के रूप में 2.50 लाख रुपए और प्रशस्ति पत्र दिये जाएंगे। । प्रो. वर्मा दरभंगा जिले के मूल निवासी हैं और वर्तमान में कानपुर में रहते हैं। पटना साइंस कॉलेज में इन्होंने 1980 से 1994 तक विद्यार्थियों को भौतिकी की शिक्षा दी है। उसके बाद आईआईटी कानपुर में अध्यापन किया। प्रो. वर्मा बिहार सहित पूरे देश में भौतिकी के सिद्धांत एवं व्यवहार को सरलता से जानने एवं समझने के लिए शिक्षकों तथा बच्चों के बीच काम कर रहे हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here