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18 की उम्र में इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ शुरू किया स्टार्टअप, आज दे रहे हैं इंजीनियर्स को नौकरी

आज हम बात कर रहे हैं कर्नाटक के हुबली में रहने वाले आनंद नाइक  की जिन्होंने  साबित कर दिया है कि यदि खुद पर यकीन हो तो सफलता का मार्ग अपने आप प्रशस्त होने लगता है ।इंजीनियरिंग की पढाई बिच में छोड़कर इन्होने खुद की कम्पनी ‘बर्डबीज़’ की शुरुआत की जो  अभी तक 150 से भी अधिक मोबाइल ऍप्लिकेशन्स का निर्माण कर चुकी है | तो चलिए जानते है इनकी सफलता की कहानी ......

ANAND NAIK-FOUNDER OF BOREDBEED

घरवाले चाहते थे इंजीनियर बनाना

 अपनी 10वीं तक की शिक्षा पूरी करने के बाद सभी सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थियों के परिवार की तरह आनंद का परिवार भी उनके उज्जवल भविष्य के लिए उन्हें कोटा के एक विख्यात कोचिंग में आई.आई.टी की प्रवेश परीक्षा की तैयारी हेतु प्रवेश दिलवा दिया। क्योंकि वे चाहते थे की उनका बेटा एक अच्छा इंजीनियर बने और उसका भविष्य सुरक्षित रहे।

 कॉलेज की पढ़ाई बीच में ही छोड़ी 

पूरी तैयारी के बाद भी जब मात्र कुछ अंकों से अपनी पसंद के इंजीनियरिंग कॉलेज में आंनद को दाखिला नहीं मिला और जो कॉलेज मिला उस कॉलेज की सीमाएं उन्हें ज्यादा दिन बाँध कर नहीं रख पाई। आंनद की किस्मत में कुछ और ही लिखा था। 18 वर्षीय आनंद ने कॉलेज की पढ़ाई बीच में ही छोड़कर अपने मन की सुनी और वापस अपने गृहनगर हुबली का रुख किया। इस छोटी सी उम्र में उन्होंने बोर्डबीज़ सोलूशन्स नाम से एक स्टार्टअप की नींव रखी।

आनंद अपने स्टार्टअप के शुरूआती दौर का जिक्र करते हुए कहते हैं कि “जब मैंने पहले–पहले काम प्रारंभ किया उस समय लोगों को मेरे व्यवसाय पर यकीन दिलाना सबसे बड़ी चुनौती थी। इसके अलावा सच कहूँ तो तकनीकी पृष्ठभूमि से भी मेरा कोई वास्ता नहीं था।”

 

ANAND NAIK

गृहनगर हुबली से किया व्यवसाय का शुभारम्भ 

आनंद के पास कोई दूसरा अनुभव भी नहीं था क्योंकि उस समय बोर्डबीज़ समूचे क्षेत्र का पहला टेक स्टार्टअप था। और अपने गृहनगर हुबली का चयन व्यवसाय के लिए करने के पीछे आनंद का कारण था कि उत्तरी कर्नाटक में हुबली एक जाना माना वाणिज्यिक और व्यावसायिक केंद्र है जिसे ‘छोटा बंबई’ भी कहा जाता है। लेकिन वहाँ ज्यादातर लोग अपना परंपरागत व्यवसाय जमा कर बैठे हैं। इस तरह परंपरागत व्यवसाय के बीच में तकनीकी व्यवसाय की शुरुआत करना अपने आप में एक चुनौती था ऐसे में एक नया व्यवसाय आई.टी समाधान कंपनी प्रारंभ करना आनंद के लिए एक खट्टा–मीठा लेकिन नए अनुभव प्रदान करने वाला रहा।

आई.टी क्षेत्र का पहला स्टार्टअप का मिला लाभ 

आंनद अपने शुरूआती दौर की याद साझा करते हुए कहते हैं “दुकानदार परीक्षण करने और फिर मोलभाव करने के लिये अक्सर ऊँचे रसूख का  इस्तेमाल करते। और कई बार तो हमें महीनों तक भुगतान ही प्राप्त नहीं हो पाता था। लेकिन कहते है समय परिवर्तनशील है एक न एक दिन बदलता जरूर है आनंद के व्यवसाय ने भी करवट बदली समय की मांग को देखते हुए अन्य तकनीकी व्यवसाय भी आनंद के साथ प्रतिस्पर्धा के मैदान में उतरे लेकिन आई.टी क्षेत्र का पहला स्टार्टअप होने का लाभ आनंद को मिला। आनंद को अब अपनी मंज़िल का रास्ता दिखने लगा था

अनुभवी इंजीनियरों को अपनी टीम में जोड़ा 

 कुछ समय बाद आनंद ने अपने स्कूल में पढ़ने वाले सीनियर जो की सॉफ्टवेयर कंपनियों के साथ काम कर रहे थे उन्हें अपनी टीम में शामिल करने की कोशिश की और वे सफल भी रहे। अनुभवी इंजीनियरों को अपनी टीम में जोड़ना आसान रहा पर अपनी टीम को बनाये रखना किसी चुनौती से कम नहीं था। अपनी टीम को जोड़े रखने, उनके उचित वेतन की व्यवस्था हेतु आनंद ने अन्य संस्थानों में अध्यापन का कार्य शुरू किया। साथ ही शैक्षिक संस्थानों में आई.टी का प्रशिक्षण देने का अनुबंध भी हासिल लिया। आंनद का जुनून मेहनत और काबिलियत का परिणाम है कि आज उनकी 60 लोगो की एक जिम्मेदार और अनुभवी टीम है।
दिलचस्प बात यह है कि उनकी टीम के ज्यादातर कर्मचारी उनसे उम्र में काफी बड़े हैं।

टीम के साथ तालमेल में सफल 

आनंद खुद कहते हैं कि मेरी टीम के सबसे उम्रदराज सदस्य 62 वर्ष के हैं और अपने टीम के सदस्यों के साथ आनंद का तालमेल बहुत ही व्यवहारिक और संवेदनशील है। आनद कहते हैं कि “मैं किसी को अपनी टीम का हिस्सा बनाने से पहले उससे एक मुलाकात जरूर करता हूँ। जिससे हमारी वैचारिक समझ बढ़ सके और हम सभी का सम्मान करते हुए कार्य करे।

कर्नाटक के सबसे लोकप्रिय उद्यमियों में से एक

आने वाले समय में उन्हें काफी प्रसिद्धी और पुरस्कार मिले और आज वे उत्तरी कर्नाटक के सबसे लोकप्रिय उद्यमियों में से एक हैं। आनंद के स्टार्टअप बोर्डबीज़ ने विनिर्माण की समस्या से निजात पाने के लिए आउटसोर्सिंग के रास्ते को चुना जिसका परिणाम यह निकला कि बर्डबीज़ विनिर्माण के क्षेत्र में ई.आर.पी समाधान कंपनी बनने में शीर्ष पर रही। एक 18 साल के किशोर की सोच ‘बर्डबीज़’ अभी तक 150 से भी अधिक मोबाइल ऍप्लिकेशन्स का निर्माण कर चुकी है और प्रगति के पथ पर अग्रसर है।

एक कॉल ने बदल दी जिन्दगी 

आंनद की बोर्डबीज़ को 2 साल ही हुए थे कि साल 2013 के एक सोमवार की दोपहर को अचानक उनके पास एक फोन आया। आनंद को लगा किसी उपभोक्ता का कॉल होगा क्योंकि फ़ोन के दूसरी तरफ से उनसे कम्पनी की कार्य प्रणाली के बारे में पूछा जा रहा था। आनंद ने भी उन्हें उपभोक्ता समझ कर बड़े ही सहज तरीके से बोर्डबीज़ कंपनी द्वारा किये जा रहे कार्यो से अवगत करवाया और कॉल समाप्ति पर आनंद को लगा की वे उपभोक्ता को संतुष्ट करने में सफल रहे। आनंद को इस बात का इल्म तक नहीं था कि ये एक फ़ोन कॉल उनकी किस्मत का रुख बदल देगा। वे कुछ कह सकते उससे पहले ही उन्हें पुनः एक कॉल आया और आनंद को बताया गया की वे इस वर्ष के “सर्वश्रेष्ठ युवा उद्यमी पुरस्कार” के विजेता हैं और भारत के मशहूर उद्योगपति रतन टाटा के द्वारा उन्हें सम्मानित किया जाएगा।
आनंद कहते है “उस कॉल ने मानो मेरी जिंदगी बदल दी हो। प्रारंभिक दौर में ही पुरस्कार और सराहना का अपना अलग ही महत्व होता है क्योंकि इसके बाद आपको मान्यता तो मिलती ही है साथ ही बाजार में स्वीकार्यता भी मिलती है।” 

18 बट नॉट टीन

वर्तमान में बोर्डबीज़ एक सफल और प्रतिष्ठित कम्पनी है। लेकिन आनंद आज भी हर दिन एक नयी शुरुआत करते हैं वे अपने अनुभवों को छात्रों और विशेषकर किशोरों के साथ साझा करते हैं और उन्हें प्रोत्साहित करते हैं। उन्होंने एक अभियान चलाया है जिसका नाम है “18 बट नॉट टीन“, जिसके माध्यम से कई कॉलेजों के युवाओं से अपने अनुभव साझा करते है। आनंद कहते हैं कि “मैंने प्रारंभिक दौर में बहुत अधिक आलोचना का सामना किया। मुझे याद है कि कैसे मेरे इस कदम को खतरनाक करार दे दिया गया था। मैं यह सुनिश्चित करना चाहता हूँ कि युवा कम उम्र में ही बड़े सपने देखने और विफलता को अपनाने में मेरे अनुभवों से कुछ सीख लेने में सफल रहें।

एक बड़ी सोच  आपकी जिंदगी बदल सकती है 

अपनी इस नयी पहल के साथ ही आनंद ने एक नई यात्रा प्रारंभ की जिसमें 25 शहर शामिल थे और सफर था 30 हजार कि.मी. से भी अधिक और मकसद यह था, छात्रों को कम उम्र में उद्यमिता के साथ प्रयोग करने के लिये प्रेरित करना।
आज आनंद ने दुनिया को बता दिया कि किसी भी व्यवसाय की शुरुआत के लिए बड़ी उम्र, ज्यादा पैसा, बड़ी जगह या फिर ज्यादा तज़ुर्बे की जरूरत नहीं होती, आवश्यकता होती है तो केवल एक बड़ी सोच की और उस सोच को हक़ीक़त में बदलने के जज़्बे की।

साभार -kenfolios.com

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