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SAWAN MONTH-WORSHIP OF SHIV LORD


सावन महिना -हिन्दुओ का पावन महिना 

(SAWAN MAHINA-HINDUO KA PAWAN MAHINA)









आज से भगवान शिव का प्रिय माह सावन शुरू हो गया है. ये सावन  अद्भुत संयोग लेकर आया है क्योंकि इस बार इसमें पांच सोमवार है. इसकी शुरुआत सोमवार से हुई है और समापन भी सोमवार को ही होगा. ये शुभ संयोग सालों में एक बार आता है. कांवड़ यात्रा भी शुरू हो गई है. देश भर के शिव मंदिरों में भोलेनाथ के जयकारे गूंज रहे हैं. पूरे सावन माह के दौरान शिवलिंग पर कुछ विशेष चीजें अर्पित करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है. खासतौर पर सोमवार को भगवान शिव के लिए व्रत और उनकी पूजा करने से उनकी विशेष कृपा होती है.तो आयिय हम जन सावन महिना की कुछ महत्पूर्ण बातें 

धार्मिक मूल्य

हिन्दू धर्म, अनेक मान्यताओं और विभिन्न प्रकार के संकलन से बना है। हिन्दू धर्म के अनुयायी इस बात से अच्छी तरह वाकिफ़ रहते हैं कि हिन्दू जीवनशैली में क्या चीज अनिवार्य है और क्या पूरी तरह वर्जित। यही वजह है कि अधिकांश हिंदू परिवारों में नीति-नियमों का भरपूर पालन किया जाता है।
हालांकि मॉडर्न होती जीवनशैली और बाहरी चकाचौंध के चक्कर में लोग अपने वास्तविक मूल्यों को दरकिनार कर चुके हैं। उदाहरण के लिए नवरात्रि को ही ले लीजिए, शायद ही कोई ऐसा घर हो जहां नवरात्रि के दिनों में मांस, मदिरा का सेवन किया जाता है। ऐसा ही कुछ सावन में भी देखा जाता है।


पवित्र माह

हिन्दू परिवारों में सावन को बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण महीने के तौर पर देखा जाता है। इसकी महत्ता इसी बात से समझी जा सकती है कि सावन के माह में मांसाहार पूरी तरह त्याज्य होता है और शाकाहार को ही उपयुक्त माना गया है। इसके अलावा मदिरा पान भी निषेध माना गया है। लेकिन ऐसा क्या है जो सावन के माह को इतना विशिष्ट बनाता है?

 हर दिन त्यौहार

चैत्र के पांचवे महीने को सावन का महीना कहा जाता है। इस माह के सभी दिन धार्मिक दृष्टिकोण से बहुत महत्व रखते हैं। गहराई से समझा जाए तो इस माह का प्रत्येक दिन एक त्यौहार की तरह मनाया जाता है।
सावन को साल का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस माह का प्रत्येक दिन किसी भी देवी-देवता की आराधना करने के लिए सबसे उपयुक्त होता है, विशेष तौर पर इस माह में भगवान शिव, माता पार्वती और श्रीकृष्ण की आराधना की जाती है।


बारिश का महीना

ऐसा कहा जाता है कि जिस तरह इस माह में कीट-पतंगे अपनी सक्रियता बढ़ा देते हैं, उसी तरह मनुष्य को भी पूजा-पाठ में अपनी सक्रियता को बढ़ा देनी चाहिए। यह महीना बारिशों का होता है, जिससे कि पानी का जल स्तर बढ़ जाता है। मूसलाधार बारिश नुकसान पहुंचा सकती है इसलिए शिव पर जल चढ़ाकर उन्हें शांत किया जाता है।

प्रेम का महीना

सावन के महीने को प्रेम और प्रजनन का महीना कहा जाता है। इस माह में मछलियां और पशु, पक्षी सभी में गर्भाधान की संभावना होती है। किसी भी गर्भवती मादा की हत्या हिन्दू धर्म में एक पाप माना गया है इसलिए सावन के महीने में जीव को मारकर उसका सेवन नहीं किया जाता।

 विष पान

महाराष्ट्र में जल स्तर को सामान्य रखने की एक अनोखी प्रथा विद्यमान है। वे सावन के महीने में समुद्र में जाकर नारियल अर्पण करते हैं ताकि किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं पहुंच पाए। एक पौराणिक कथा धार्मिक हिन्दू दस्तावेजों में मौजूद है जिसके अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले विष का पान करने से भगवान शिव के शरीर का तापमान तेज गति से बढ़ने लगा था।

 इन्द्र देव द्वारा बारिश

ऐसे में शरीर को शीतल रखने के लिए भोलेनाथ ने चंद्रमा को अपने सिर पर धारण किया और अन्य देव उन पर जल की वर्षा करने लगे। यहां तक कि इन्द्र देव भी यह चाहते थे कि भगवान शिव के शरीर का तापमान कम हो जाए इसलिए उन्होंने अपने तेज से मूसलाधार बारिश कर दी। इस वजह से सावन के महीने में अत्याधिक बारिश होती है, जिससे भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं।

 कावड़

भगवान शिव के भक्त कावड़ ले जाकर गंगा का पानी शिव की प्रतिमा पर अर्पित कर उन्हें प्रसन्न करने का प्रयत्न करते हैं। इसके अलावा सावन माह के प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव पर जल चढ़ाना शुभ और फलदायी माना जाता है।

 व्रत का महत्व

सावन के महीने में व्रत रखने का भी विशेष महत्व दर्शाया गया है। ऐसी मान्यता है कि कुंवारी लड़कियां अगर इस पूरे महीने व्रत रखती हैं तो उन्हें उनकी पसंद का जीवनसाथी मिलता है। इसके पीछे भी एक कथा मौजूद है जो शिव और पार्वती से जुड़ी है।

पार्वती का विवाह

पिता दक्ष द्वारा अपने पति का अपमान होता देख सती ने आत्मदाह कर लिया था। पार्वती के रूप में सती ने पुनर्जन्म लिया और शिव को अपना बनाने के लिए उन्होंने सावन के सभी सोमवार का व्रत रखा। फलस्वरूप उन्हें भगवान शिव पति रूप में मिले।


 वैज्ञानिक पहलू

यह सब तो पौराणिक मान्यताएं हैं, जिनका सीधा संबंध धार्मिक कथाओं से है। परंतु सावन के महीने में मांसाहार से क्यों परहेज किया जाता है इसके पीछे का कारण धार्मिक के साथ-साथ वैज्ञानिक भी है।
दरअसल सावन के पूरे माह में भरपूर बारिश होती है जिससे कि कीड़े-मकोड़े सक्रिय हो जाते हैं। इसके अलावा इस मौसम में उनका प्रजनन भी अधिक मात्रा में होता है। इसलिए बाहर के खाने का सेवन सही नहीं माना जाता।
पशु-पक्षी, जिस माहौल में रहते हैं वहां साफ-सफाई का विशेष ध्यान नहीं रखा जाता, जिससे कि उनके भी संक्रमित होने की संभावना बढ़ती है। इसलिए मांसाहार को वर्जित कहा गया है।

आयुर्वेद

आयुर्वेद में भी इस बात का जिक्र है कि सावन के महीने में मांस के संक्रमित होने की संभावना बहुत ज्यादा होती है, इसलिए इस पूरे माह मांस-मछली या अन्य मांसाहार के सेवन को निषेध कहा गया है।






साभार - Speakingtree

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