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पांच बड़े विवाद जिसके बाद नीतीश कुमार को उठाना पड़ा यह बड़ा कदम

पांच बड़े विवाद जिसके बाद नीतीश कुमार को उठाना पड़ा यह बड़ा कदम 




बिहार में छठी बार मुख्यमंत्री पद के रूप में आज सुबह दस बजे नीतीश कुमार ने राजभवन के मंडपम हॉल में शपथ ली। बिहार में बुधवार को शुरू हुए घटनाक्रम का पटाक्षेप हो गया और एनडीए के साथ मिलकर नीतीश कुमार ने फिर एक बार बिहार में सरकार बनाई है और उपमुख्यमंत्री पद एक बार फिर से भाजपा नेता सुशील मोदी को सौंपा है।उन्होंने यह साफ कर दिया कि किसी भी कीमत पर वे भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति से समझौता नहीं कर सकते हैं। यही वजह है कि जब राजद विधानमंडल दल की बैठक के बाद अंतिम रूप से जब यह तय हो गया कि डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव इस्तीफा नहीं देंगे तो उन्होंने खुद ही इस्तीफा दे दिया। 

इसे जहां एक ओर बिहार के लिए नई दशा और दिशा के रूप में देखा जा रहा है वहीं बिहार में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। नीतीश की घरवापसी की बात कहें तो यह सही है, एक बार जब नीतीश ने बीजेपी की मदद से बिहार में सरकार बनाई थी तो सरकार अच्छी तरह चली थी, लेकिन कुछ मुद्दों के टकराव के बाद नीतीश ने राजद और कांग्रेस के साथ महागठबंधन कर नई सरकार बना ली।

महागठबंधन बन तो गया लेकिन नीतीश को शायद मालूम नहीं था कि वो राजनीतिक रूप से धुर विरोधी रहे जिस लालू यादव से हाथ मिला रहे हैं वो राजद बदला नहीं है और उसकी नीतियां वहीं हैं जो पहले रही थीं जिसका नीतीश ने जमकर विरोध किया था। फिर एक बार उसके साथ मिलकर किसी तरह अपने आपको संयमित करके नीतीश ने बीस महीने सरकार चलाई।

इन बीस महीनों में बिहार के विकास का काम कम और आरोप-प्रत्यारोप वर्चस्व की लड़ाई चलती रही, अपराध चरम पर पहुंच गया, जनता परेशान हो गई। नीतीश ने खुद की बदौलत अपना स्टैंड लेकर कई बड़ी घोषणाएं कीं जिसमें महागठबंधन की पार्टियों ने मन से उनका साथ नहीं दिया। लेकिन कुछ मामलों को लेकर उन्होंने केंद्र सरकार की जमकर तारीफ जो महागठबंधन के नेताओं को नहीं भायी।

राजनीति में स्वार्थ नहीं देश हित जनहित और राज्यहित की सोच वाले नीतीश को अपने खुद के दोस्तों के विरोध का सामना करना पड़ा। विरोध के स्वर फूटने लगे और नीतीश को दबाव का सामना करना पड़ा। नीतीश जो कभी दबाव की राजनीति नहीं करते उन्हें अपने ही लोगों ने अांख दिखाना शुरू कर दिया। 

बिहार में जो विकास की बयार बह रही थी वो राजनीति की बिसात में दब गई और मोहरों ने अपने-अपने घरों में कुचक्र करना शुरू कर दिया। जब पानी सर से ऊपर जाने लगा और नीतीश असहज होने लगे तो उन्होंने राज्य हित में बड़ा फैसला लेते हुए अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंपने का फैसला किया और बिहार के विकास के लिए नीतीश को बीजेपी का साथ मिला। इस तरह एक बार फिर नीतीश की घरवापसी ट्विटर पर ट्रेंड करने लगी।

करीब 20 दिनों से चले आ रहे हैं राजनीतिक कयासों के दौर नीतीश कुमार के इस्तीफे के साथ ही खत्‍म हो गये हैं। अब हम आपको बता रहे हैं वह पांच बड़े विवाद जिसके बाद नीतीश कुमार को यह बड़ा कदम उठाना पड़ा।

पहली घटना  

5 जुलाई को सीबीआइ ने लालू प्रसाद, राबड़ी देवी व तेजस्वी यादव समेत आठ लोगों पर एफआरआइ दर्ज किया। नीतीश कुमार ने तेजस्वी यादव से जनता के बीच तथ्यों पर आधारित स्पष्ट जवाब देने को कहा। लालू प्रसाद ने कहा, तेजस्वी यादव इस्तीफा नहीं देंगे।

दूसरी घटना  

राष्ट्रपति चुनाव में जदयू ने एनडीए उम्मीदवार को समर्थन दिया। इस पर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने कहा, नीतीश ऐतिहासिक भूल कर रहे हैं, अपने फैसले पर पुनर्विचार करें। 

तीसरी घटना

जदयू द्वारा तेजस्वी यादव के इस्तीफे को लेकर दबाव बढ़ा तो राजद ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की छवि पर हमला किया। राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह कहा, भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का ढोंग कर रहे हैं नीतीश। राजद के इस हमले को जदयू ने अपने नेता का अपमान माना। जदयू-राजद के बीच तल्खी और बढ़ी। छवि को लेकर बेहद संवेदनशील रहने वाले नीतीश कुमार के लिए महागठबंधन को चलाना मुश्किल हो गया।

चौथी घटना

एनडीए के विरुद्ध विपक्ष की एकजुटता को लेकर राजद ने 27 अगस्त को गांधी मैदान में भाजपा भगाओ रैली की एकतरफा घोषणा की। इससे भी जदयू-राजद के बीच दूरी बढ़ी। 

पांचवी घटना

नीतीश कुमार को लेकर कांग्रेस ने भी तंज कसा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री अखिलेश सिंह ने कहा, कांग्रेस को नीतीश की जरूरत नहीं। इससे भी महागठबंधन में दूरी बढ़ी। 



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