Disqus Shortname

Breaking News

KABHI YUN MILE KOI -BASHIR BADR

कभी यूँ मिलें कोई मसलेहत, कोई ख़ौफ़ दिल में ज़रा न हो

  बशीर बद्र (BASHIR BADR )






कभी यूँ मिलें कोई मसलेहत, कोई ख़ौफ़ दिल में ज़रा न हो

मुझे अपनी कोई ख़बर न हो, तुझे अपना कोई पता न हो


वो फ़िराक़ हो या विसाल हो, तेरी याद महकेगी एक दिन

वो ग़ुलाब बन के खिलेगा क्या, जो चिराग़ बन के जला न हो



कभी धूप दे, कभी बदलियाँ, दिलो-जाँ से दोनों क़ुबूल हैं

मगर उस नगर में न क़ैद कर, जहाँ ज़िन्दगी का हवा न हो



वो हज़ारों बाग़ों का बाग़ हो, तेरी बरक़तों की बहार से

जहाँ कोई शाख़ हरी न हो, जहाँ कोई फूल खिला न हो



तेरे इख़्तियार में क्या नहीं, मुझे इस तरह से नवाज़ दे

यूँ दुआयें मेरी क़ुबूल हों, मेरे दिल में कोई दुआ न हो




कभी हम भी जिस के क़रीब थे, दिलो-जाँ से बढ़कर अज़ीज़ थे

मगर आज ऐसे मिला है वो, कभी पहले जैसे मिला न हो


No comments