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NIKKI HALEY BIOGRAPHY IN HINDI



निक्की हेली

(यूएन में अमेरिकी राजदूत)


मेरे माता-पिता भारत से अमेरिका आए थे।
 वे सिख हैं। बचपन में हम गुरुद्वारे जाया करते थे। 
ये बातें हमने कभी नहीं छिपाईं।
 भारत से रिश्ता होना मेरे लिए गर्व की बात है। 
मैंने हमेशा प्रवासियों के हक की आवाज उठाई।
 आगे भी मैं इन मुद्दों पर काम करूंगी।



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निक्की के माता-पिता पंजाब के रहने वाले थे। उनका परिवार अमृतसर शहर में रहता था। पिता अजित सिंह रंधावा पंजाब कृषि विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थे। पीएचडी करने के लिए उन्होंने कई विदेशी यूनिवर्सिटी में आवेदन किए। उनका सपना पूरा हुआ। ब्रिटिश यूनिवर्सिटी ऑफ कोलंबिया से स्कॉलरशिप मिल गई और वह पत्नी राजकौर के संग कनाडा चले गए। 1969 में अमेरिका की साउथ कैरोलिना में प्रोफेसर की नौकरी मिल गई। दो साल बाद उनके घर बेटी पैदा हुई। सब उसे प्यार से निक्की बुलाने लगे, जबकि स्कूल में उनका नाम नम्रता रंधावा था। वे साउथ कैरोलिना के बैमबर्ग शहर में रहते थे। पड़ोस में ज्यादातर लोग ईसाई धर्म को मानने वाले थे। 

हर रविवार को नन्ही निक्की मम्मी-पापा के संग गुरुद्वारे जाया करती थीं। स्कूल के दिनों से ही उन्हें नस्ली भेदभाव का एहसास होने लगा। तब वह पांच साल की थीं। स्कूल में बच्चों की फैशन प्रतियोगिता हुई। बच्चों को सुंदर ड्रेस के साथ मंच पर कैटवॉक करना था। निक्की और उनकी छोटी बहन सिमरन ने भी इसमें हिस्सा लिया। मां ने दोनों बेटियों को बड़ी शिद्दत से तैयार किया। उन्हें कैटवॉक करने और बोलने का अभ्यास भी कराया। नियम के मुताबिक, प्रतियोगिता में एक श्वेत और एक अश्वेत लड़की को मिस लिटिल बैमबर्ग का खिताब मिलना था। मगर जज ने निक्की की दावेदारी को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह लड़की तो न तो श्वेत है और न अश्वेत। नन्ही निक्की सुबकते हुए लौट आईं। वह नहीं समझ पाईं कि ऐसा क्यों हुआ?

 यही नहीं, स्कूल में साथी बच्चों की छेड़छाड़ से बचने के लिए उनके छोटे भाई को अपने केश कटवाने पड़े। हालांकि उनके परिवार ने इन बातों को कभी अपने बच्चों के मन पर हावी नहीं होने दिया। मां ने बच्चों को भारतीय परंपराओं के साथ-साथ अमेरिकी रिवाज में ढालने की कोशिश की, ताकि वे बाकी बच्चों के संग आसानी से सामंजस्य बिठा सकें। निक्कीबताती हैं, बचपन में हम गुरुद्वारे जाया करते थे। बाद में हम चर्च भी जाने लगे। हम सिख हैं,यह बात हमने कभी किसी से नहीं छिपाई। बल्कि यह तो मेरे लिए गर्व की बात रही है। 

उनकी मां ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की थी। अमेरिका जाने के बाद उन्होंने शिक्षाशास्त्र में मास्टर डिग्री हासिल की और साउथ कैरोलिना के एक पब्लिक स्कूल में पढ़ाने लगीं। पढ़ाई के अलावा उन्हें फैशन डिजाइनिंग में भी दिलचस्पी थी। इसी क्षेत्र में कुछ नया करने के इरादे से उन्होंने 1976 में लेडीज कपड़ों की एक दुकान खोली। दुकान चल पड़ी। शुरुआत में यह एक छोटी-सी बुटीक थे, 1980 में यह इग्जोटिका इंटरनेशनल ब्रांड बन गई। स्कूल के बाद जब भी निक्की को मौका मिलता, वह मां की बुटीक में पहुंच जातीं उनकी मदद करने। जल्द ही वह ग्राहकों से बात करना और मोलभाव करना सीख गईं। मां ने उन्हें अकाउंट की जिम्मेदारी दे दी।

 इस बीच निक्की ने क्लेमसन यूनिवर्सिटी से अकांउटिंग में स्नातक डिग्री हासिल की। एक वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी में नौकरी मिली, पर यहां मन नहीं लगा। वर्ष 1994 में वह मां की कंपनी में चीफ फाइनेंस ऑफिसर बनीं। मां के अनुभव और बेटी के नए नजरिये ने बिजनेस को नई बुलंदियों तक पहुंचाया। वर्ष 1996 में उनकी मुलाकात माइकल हेली से हुई, जो उस समय आर्मी नेशनल गार्ड में अफसर थे। दोनों में अच्छी दोस्ती हो गई। बाद में यह दोस्ती प्यार में बदल गई। वे एक-दूसरे के धर्म का सम्मान करते थे। उन्होंने सिख और ईसाई धर्म के रीति-रिवाज के मुताबिक शादी की। शादी समारोह दो बार हुआ, पहले गुरुद्वारे में और फिर चर्च में। इसके बाद नम्रता रंधावा निक्की हेली के नाम से मशहूर हो गईं। उनके दो बच्चे हैं- रेना और नलिन। बतौर बिजनेस वुमेन निक्की ने खूब शोहरत बटोरी। उनकी कामयाबी महिलाओं के लिए मिसाल बनी। 

उद्यमियों की समस्याओं खासकर टैक्स कम करवाने के लिए उन्होंने कड़ा संघर्ष किया। वर्ष 1998 में उन्हें ऑरेंजबर्ग काउंटी के चैंबर ऑफ कॉमर्स के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में शामिल किया गया। साल 2003 में वह नेशनल एसोसिएशन ऑफ वुमेन बिजनेस ऑनर्स की कोषाध्यक्ष बनीं। बाद में साउथ कैरोलिना चेप्टर के महिला बिजनेस एसोसिएशन की अध्यक्ष बनीं। अब वह पूरे प्रांत में लोकप्रिय हो चुकी थीं। 2004 में रिपब्लिकन पार्टी की ओर से उन्होंने साउथ कैरोलिना हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव का चुनाव लड़ा। वर्ष 2010 में वह इस राज्य की पहली भारतीय-अमेरिकी महिला गवर्नर बनीं। साल 2014 में वह फिर गवर्नर चुनी गईं। पिछले सप्ताह अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें संयुक्त राष्ट्र में राजदूत नियुक्त करने का एलान किया।

 इतिहास में पहली बार किसी भारतीय-अमेरिकी महिला को यह जिम्मेदारी मिली है। निक्की कहती हैं, अमेरिका में बड़ा बदलाव हो रहा है। ट्रंप चाहते हैं कि मौजूदा माहौल में मैं संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका का नजरिया पेश करूं। खुशी है कि मुङो इस जिम्मेदारी के काबिल माना गया। ट्रंप ने निक्की की तारीफ करते हुए उन्हें बेहतरीन नेता बताया।

साभार - हिंदुस्तान अख़बार 

1 comment:

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