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PRARTHNA THOMBARE BIOGRAPHY IN HINDI

 प्रार्थना थोम्बरे

(टेनिस खिलाडी )


                               

महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में एक छोटा सा कस्बा है बार्शी। प्रार्थना अपने मम्मी-पापा और दादाजी के संग यहीं रहती थीं। उन दिनों मोहल्ले के किसी घर में टीवी नहीं था। कुछ ही घरों में बिजली थी। कस्बे में एक पुराना टेनिस कोर्ट था। कुछ लोग रोजाना शाम को शौकिया खेलने आया करते थे।दादा जी को टेनिस का बड़ा शौक था। वह अक्सर शाम को वहां जाते थे। नन्ही प्रार्थना को जब भी मौका मिलता, दादा जी का हाथ पकड़कर चल पड़ती थीं उनके संग।

उन दिनों आस-पास के इलाके में कोई बड़ा टेनिस खिलाड़ी नहीं था। न ही इस खेल के बारे में परिवार में कोई खास चर्चा होती थी। मगर प्रार्थना को टेनिस में मजा आने लगा था। वह टेनिस कोर्ट में खेलना चाहती थीं, पर वहां अक्सर बड़े बच्चों का कब्जा रहता था, इसलिए उन्हें मौका नहीं मिलता था। पर दादा जी ने पोती को मायूस नहीं होने दिया। उन्होंने प्रार्थना को घर में ही टेनिस सिखाया।इस बीच जब स्कूल में पाठ्यक्रम से इतर गतिविधि चुनने का मौका आया, तो प्रार्थना ने टेनिस को चुना। जबकि उनके साथ की ज्यादातर लड़कियों ने डांस या पेंटिंग सीखना पसंद किया।

 जल्द ही वह स्कूल की टेनिस टीम में शामिल हो गईं। प्रार्थना कहती हैं, शुरुआत में टेनिस मेरे लिए बस एक शौक था। बचपन में मैंने किसी टेनिस खिलाड़ी का नाम तक नहीं सुना था। घर में टीवी नहीं था, इसलिए कभी टेनिस मैच भी नहीं देखा था। टेनिस टीम में शामिल होने के बाद पहली बार मुङो किसी ने सानिया मिर्जा के बारे में बताया।शुरुआत में परिवार को लगा कि बच्ची शौकिया टेनिस खेल रही है। आगे चलकर तो इसे करियर के लिहाज से गणित और विज्ञान पर ही जोर देना होगा। मां ने हमेशा पढ़ाई पर जोर दिया। मगर प्रार्थना के लिए अब टेनिस जुनून बन चुका था।

 दस साल की उम्र में उन्होंने स्कूल की तरफ से अंडर 14 टीम में खेलते हुए नेशनल टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल हासिल किया। परिवार के लिए उनकी यह कामयाबी चौंकाने वाली थी। टेनिस कोच ने कहा कि यह लड़की बेहतरीन टेनिस खिलाड़ी बनेगी। इसे टेनिस में ही करियर बनाना चाहिए। तब पापा गुलाब राय को महसूस हुआ कि बेटी को प्रोफेशनल ट्रेनिंग दिलवानी होगी।बार्शी कस्बे में टेनिस ट्रेनिंग के लिए कोई एकेडमी नहीं थी। पापा सोलापुर में सिविल इंजीनियर थे। उन्हें पता चला कि सोलापुर में टेनिस एकेडमी है। एकेडमी उनके घर से करीब 70 किलोमीटर की दूरी पर थी। दो घंटे लगते थे वहां पहुंचने में। मां प्रार्थना को सुबह पांच बजे जगा देती थीं। पापा उनसे पहले ही जग जाते थे। बेटी को स्कूटर पर पीछे बिठाते और चल पड़ते एकेडमी की तरफ। एकेडमी पहुंचने के बाद प्रार्थना ट्रेनिंग में व्यस्त हो जातीं और पापा अपने ऑफिस के काम निपटाते। शाम को ऑफिस से निकलने के बाद बेटी को एकेडमी से लेते और वापस बार्शी की ओर चल पड़ते।

अक्सर प्रार्थना को पापा का इंतजार करना पड़ता था।इस फालतू समय में वह अतिरिक्त अभ्यास करती थीं। यह सिलसिला करीब दो साल तक चला। प्रार्थना कहती हैं, पापा ने मेरे लिए बहुत मेहनत की। वह रोजाना मुङो लेकर 70 किलोमीटर का सफर तय करते। मैं थक जाती थी, पर पापा ने मुङो कभी हताश नहीं होने दिया।दो साल बाद पापा को लगा कि एकेडमी और घर के बीच दूरी की वजह से बेटी का काफी समय बर्बाद होता है। इसलिए उन्होंने परिवार के संग सोलापुर में रहने का फैसला किया। प्रार्थना कहती हैं, छह घंटे की ट्रेनिंग और कम से कम चार घंटे आने-जाने में खर्च होते थे। काफी थकावट हो जाती थी। तब हमारे पास इतने पैसे नहीं होते थे कि मैं सोलापुर में हॉस्टल लेकर रह पाती। सोलापुर में आने के बाद जीत का सिलसिला चल पड़ा। एक के बाद एक टूर्नामेंट जीते।

अब वह अंतरराष्ट्रीय मुकाबले के लिए तैयार थीं।पिछले साल मिर्जा टेनिस एकेडमी में ट्रेनिंग के लिए वह हैदराबाद चली गईं। एक साल खूब मेहनत की। कई अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भारत का परचम लहराया। उन्होंने अब तक तीन आईटीएफ और 17 डबल्स टाइटल जीते हैं। 2014 के एशियाड में उन्हें कांस्य पदक मिला। साउथ एशियन गेम्स में उन्होंने गोल्ड मेडल अपने नाम किया। डबल्स मुकाबले में उन्हें दुनिया की नंबर वन खिलाड़ी सानिया मिर्जा के साथ खेलने का मौका मिला। प्रार्थना कहती हैं, सानिया नंबर वन हैं। उनके साथ खेलना बहुत बड़ी बात है। उनसे मुङो काफी मदद मिली है।

मिर्जा एकेडमी में जाने के बाद उनके खेलने का अंदाज बदल गया। समय के साथ आत्मविश्वास बढ़ता गया। प्रार्थना बताती हैं, छोटे कस्बे में ट्रेनिंग का स्तर उतना बढ़िया नहीं था। सानिया के पिता इमरान मिर्जा मेरे कोच हैं। उन्होंने मेरे खेल को एकदम से बदल दिया। पहले मैं बचाव मुद्रा में खेलती थी, उन्होंने मुङो आक्रामक शॉट खेलना सिखाया।पिछले महीने रियो ओलंपिक टीम का एलान हुआ। खिलाड़ियों में उनका नाम भी शामिल है। 22 साल की प्रार्थना अब सानिया मिर्जा के संग ओलंपिक के डबल्स मुकाबले में हिस्सा लेंगी। प्रार्थना कहती हैं, सानिया मेरी रोल मॉडल रही हैं। ओलंपिक में उनके साथ मैं खेलूंगी, यह यकीन नहीं होता। कहीं यह सपना तो नहीं है।

साभार - हिंदुस्तान अख़बार 

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