Sunday, September 6, 2015

FCI JE CIVIL 2015 QUESTION PAPER

                         



                     FCI JE CIVIL 2015 QUESTION PAPER

        Food corporation of india held exam of east zone junior engg civil on 06 September 2015
       Paper 1 is non technical and same for all branch and paper 2 is technical
       You can download paper 1 and paper 2 from below link


                                           PAPER 1 NON TECHNICAL
               
                                                        DOWNLOAD
  
                                      PAPER 2 TECHNICAL CIVIL ENGG.

                                                      DOWNLOAD

Wednesday, March 18, 2015

यह कदम्ब का पेड़ - सुभद्राकुमारी चौहान


रचनाकार: सुभद्राकुमारी चौहान

यह कदंब का पेड़ अगर माँ होता यमुना तीरे।
मैं भी उस पर बैठ कन्हैया बनता धीरे-धीरे।। 
ले देतीं यदि मुझे बांसुरी तुम दो पैसे वाली।
किसी तरह नीची हो जाती यह कदंब की डाली।। 
तुम्हें नहीं कुछ कहता पर मैं चुपके-चुपके आता।
उस नीची डाली से अम्मा ऊँचे पर चढ़ जाता।। 
वहीं बैठ फिर बड़े मजे से मैं बांसुरी बजाता।
अम्मा-अम्मा कह वंशी के स्वर में तुम्हे बुलाता।। 
बहुत बुलाने पर भी माँ जब नहीं उतर कर आता।
माँ, तब माँ का हृदय तुम्हारा बहुत विकल हो जाता।। 
तुम आँचल फैला कर अम्मां वहीं पेड़ के नीचे।
ईश्वर से कुछ विनती करतीं बैठी आँखें मीचे।। 
तुम्हें ध्यान में लगी देख मैं धीरे-धीरे आता।
और तुम्हारे फैले आँचल के नीचे छिप जाता।। 
तुम घबरा कर आँख खोलतीं, पर माँ खुश हो जाती।
जब अपने मुन्ना राजा को गोदी में ही पातीं।। 
इसी तरह कुछ खेला करते हम-तुम धीरे-धीरे।
यह कदंब का पेड़ अगर माँ होता यमुना तीरे।। 

Wednesday, March 4, 2015

अच्छे कर्म … बुरे कर्म …

1 दिन एक राजा ने अपने 3 मन्त्रियो को दरबार में  बुलाया, और  तीनो  को  आदेश  दिया  के  एक  एक  थैला  ले  कर  बगीचे  में  जाएं ..,
और
वहां  से  अच्छे  अच्छे  फल  (fruits ) जमा  करें .
वो  तीनो  अलग  अलग  बाग़  में प्रविष्ट  हो  गए ,
पहले  मन्त्री  ने  कोशिश  की  के  राजा  के  लिए  उसकी पसंद  के  अच्छे  अच्छे  और  मज़ेदार  फल  जमा  किए जाएँ , उस ने  काफी  मेहनत  के  बाद  बढ़िया और  ताज़ा  फलों  से  थैला  भर  लिया ,

दूसरे मन्त्री  ने  सोचा  राजा  हर  फल  का परीक्षण  तो करेगा नहीं , इस  लिए  उसने  जल्दी  जल्दी  थैला  भरने  में  ताज़ा , कच्चे , गले  सड़े फल  भी  थैले  में  भर  लिए ,
तीसरे  मन्त्री  ने  सोचा  राजा  की  नज़र  तो  सिर्फ  भरे  हुवे थैले  की  तरफ  होगी  वो  खोल  कर  देखेगा  भी  नहीं  कि  इसमें  क्या  है , उसने  समय बचाने  के  लिए  जल्दी  जल्दी  इसमें  घास , और  पत्ते  भर  लिए  और  वक़्त  बचाया .
दूसरे  दिन  राजा  ने  तीनों मन्त्रियो  को  उनके  थैलों  समेत  दरबार  में  बुलाया  और  उनके  थैले  खोल  कर  भी  नही देखे  और  आदेश दिया  कि , तीनों  को  उनके  थैलों  समेत  दूर  स्थान के एक जेल  में  ३  महीने  क़ैद  कर  दिया  जाए .
अब  जेल  में  उनके  पास  खाने  पीने  को  कुछ  भी  नहीं  था  सिवाए  उन  थैलों  के ,
तो  जिस मन्त्री ने  अच्छे  अच्छे  फल  जमा  किये  वो  तो  मज़े  से  खाता  रहा  और  3 महीने  गुज़र  भी  गए ,

फिर  दूसरा  मन्त्री जिसने  ताज़ा , कच्चे  गले  सड़े  फल  जमा  किये  थे,  वह कुछ  दिन  तो  ताज़ा  फल  खाता  रहा  फिर  उसे  ख़राब  फल  खाने  पड़े , जिस  से  वो  बीमार  होगया  और  बहुत  तकलीफ  उठानी  पड़ी .
और  तीसरा मन्त्री  जिसने  थैले  में  सिर्फ  घास  और  पत्ते  जमा  किये  थे  वो  कुछ  ही  दिनों  में  भूख  से  मर  गया .
अब  आप  अपने  आप  से  पूछिये  कि  आप  क्या  जमा  कर  रहे  हो  ??
आप  इस समय जीवन के  बाग़  में  हैं , जहाँ  चाहें  तो  अच्छे कर्म जमा  करें ..
चाहें  तो बुरे कर्म ,
मगर याद रहे जो आप जमा करेंगे वही आपको आखरी समय काम आयेगा  क्योंकि दुनिया क़ा राजा आपको चारों ओर से देख रहा है  ।

अच्छी आदत का प्रतिफल

अच्छी आदत का प्रतिफल


एक बर्फ बनाने की विशाल फैक्ट्री थी! हजारों टन बर्फ हमेशा बनता था ! सैकड़ों मजदूर व अन्य कर्मचारी एवं अधिकारी वहां कार्य करते थे ! उन्ही में से था एक कर्मचारी अखिलेश ! अखिलेश उस फैक्ट्री में पिछले बीस वर्षों से कार्य कर रहा था ! उसके मृदु व्यहार, ईमानदारी,एवं काम के प्रति समर्पित भावना के कारण वो उन्नति करते करते उच्च सुपरवाइजर के पद पर पहुँच गया था ! उसको फैक्ट्री के हर काम की जानकारी थी ! जब भी कोई मुश्किल घडी होती सब, यहाँ तक की फैक्ट्री के मालिक भी उसी को याद करते थे और वह उस मुश्किल पलों को चुटकियों में हल कर देता था ! इसी लिए फैक्ट्री में सभी लोग ,कर्मचारी ,व् अन्य अधिकारी उसका बहुत मान करते थे ! इन सब के अलावा उसकी एक छोटी सी अच्छी आदत और थी वह जब भी फैक्ट्री में प्रवेश करता फैक्ट्री के गेट पर तैनात सुरक्षा गार्ड से ले कर सभी अधिनिस्त कर्मचारियों से मुस्कुरा कर बात करता उनकी कुशलक्षेम पूछता और फिर अपने कक्ष में जा कर अपने काम में लग जाता !और यही सब वह जब फैक्ट्री का समय समाप्त होने पर घर पर जाते समय करता था ! एक दिन फैक्ट्री के मालिक ने अखिलेश को बुला कर कहा ” अखिलेश एक मल्टी नेशनल कम्पनी जो की आइसक्रीम बनती है ने हमें एक बहुत बड़ा आर्डर दिया है और हमें इस आर्डर को हर हाल में नीयत तिथि तक पूरा करना है ताकि कंपनी की साख और लाभ दोनों में बढ़ोतरी हो तथा और नई मल्टी नेशनल कंपनियां हमारी कंपनी से जुड़ सके ! इस काम को पूरा करने के लिए तुम कुछ भी कर सकते हो चाहे कर्मचारियों को ओवरटाइम दो बोनस दो या और नई भर्ती करो पर आर्डर समय पर पूरा कर पार्टी को भिजवाओ “अखिलेश ने कहा ठीक है में इस आर्डर को समय पर पूरा कर दूंगा ! मालिक ने मुस्कुरा कर अखिलेश से कहा “मुझे तुमसे इसी उत्तर की आशा थी”
अखिलेश ने सभी मजदूरों को एकत्रित किया और आर्डर मिलाने की बात कही और कहा “मित्रो हमें हर हाल में ये आर्डर पूरा करना है इसके लिए सभी कर्मचारियों को ओवरटाइम, बोनस सभी कुछ मिलेगा साथ ही ये कंपनी की साख का भी सवाल है “!एक तो कर्मचारियों का अखिलेश के प्रति सम्मान की भावना तथा दूसरी और ओवरटाइम व बोनस मिलाने की ख़ुशी ,सभी कर्मचरियों ने हां कर दी ! फैक्ट्री में दिन रात युद्धस्तर पर काम चालू हो गया !अखिलेश स्वयं भी सभी कर्मचारियों का होसला बढ़ाता हुआ उनके कंधे से कन्धा मिला कर काम कर रहा था ! उन सभी की मेहनत रंग लाइ और समस्त कार्य नीयत तिथि से पूर्व ही समाप्त हो गया ! सारी की सारी बर्फ शीतलीकरण (कोल्ड स्टोरेज) कक्ष जो एकविशाल अत्याधुनिक तकनीक से बना हुआ तथा कम्प्यूटराइज्ड था , में पेक कर के जमा कर दी गई ! सभी कर्मचारी काम से थक गए थे इस लिए उस रोज काम बंद कर सभी कर्मचारियों की छुट्टी कर दी गई सभी कर्मचारी अपने अपने घर की तरफ प्रस्तान करने लगे !
अखिलेश ने सभी कार्य की जांच की और वह भी घर जाने की तैयारी करने लगा जाते जाते उसने सोचा चलो एक बार शीतलीकरण कक्ष की भी जाँच कर ली जाये की सारी की सारी बर्फ पैक्ड और सही है की नहीं ,यह सोच वो शीतलीकरण कक्ष को खोल कर उसमे प्रवेश कर गया ! उसने घूम फिर कर सब चेक किया और सभी कुछ सही पा कर वह जाने को वापस मुडा ! पर किसी तकनीकी खराबी के कारण शीतलीकरण कक्ष का दरवाजा स्वतः ही बंद हो गया ! दरवाजा ऑटोमेटिक था तथा बाहर से ही खुलता था इस लिए उसने दरवाजे को जोर जोर से थपथपाया पर सभी कर्मचारी जा चुके थे उसकी थपथपाहट का कोई असर नहीं हुआ उसने दरवाजा खोलने की बहुत कोशिश की पर सब कुछ बेकार रहा ! दरवाजा केवल बाहर से ही खुल सकता था !अखिलेश घबरा गया उसने और जोर से दरवाजे को पीटा जोर से चिल्लाया पर कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई ! अखिलेश सोचने लगा की कुछ ही घंटों में शीतलीकरण कक्ष का तापक्रम शून्य डिग्री से भी कम हो जायेगा ऐसी दशा में मेरा खून का जमना निश्चित है ! उसे अपनी मोत नजदीक दिखाई देने लगी !उसने एक बार पुनः दरवाजा खोलने की कोशिश की पर सब कुछ व्यर्थ रहा !कक्ष का ताप धीरे धीरे कम होता जा रहा था ! अखिलेश का बदन अकड़ने लगा ! वो जोर जोर से अपने आप को गर्म रखने के लिए भाग दौड़ करने लगा ! पर कब तक आखिर थक कर एक स्थान पर बैठ गया ! ताप शुन्य डिग्री की तरफ बढ़ रहा था ! अखिलेश की चेतना शुन्य होने लगी ! उसने अपने आप को जाग्रत रखने की बहुत कोशिश की पर सब निष्फल रहा ! ताप के और कम होने पर उसका खून जमने के कगार पर आ गया ! और अखिलेश भावना शुन्य होने लगा ! मोत निश्चित जान वह अचेत हो कर वही ज़मीन पर गिर पड़ा !
कुछ ही समय पश्चात दरवाजा धीरे से खुला ! एक साया अंदर आया उसने अचेत अखिलेश को उठाया और शीतलीकरण कक्ष से बाहर ला कर लिटाया उसे गर्म कम्बल से ढंका और पास ही पड़ा फैक्ट्री के कबाड़ को एकत्रित कर उसमे आग जलाई ताकि अखिलेश को गर्मी मिल सके और उसका रक्तसंचार सुचारू हो सके ! गर्मी पाकर अखिलेश के शरीर में कुछ शक्ति आई उसका रक्तसंचार सही होने लगा ! आधे घंटे के बाद अखिलेश के शरीर में हरकत होने लगी उसका रक्तसंचार सही हुआ और उसने अपनी आँखे खोली ! उसने सामने गेट पर पहरा देने वाले सुरक्षा गार्ड शेखर को पाया ! उसने शेखर से पुछा मुझे बाहर किसने निकला और तुम तो में गेट पर रहते हो तुम्हारा तो फैक्ट्री के अंदर कोई कार्य भी नहीं फिर तुम यहाँ कैसे आये ?शेखर ने कहा “सर में एक मामूली सा सुरक्षा गार्ड हूँ ! फैक्ट्री में प्रवेश करने वाले प्रत्येक पर निगाहे रखना तथा सभी कर्नचारियों व अधिकारियो को सेल्यूट करना ये ही मेरी ड्यूटी है ! मेरे अभिवादन पर अधिकतर कोई ध्यान नहीं देता कभी कभी कोई मुस्कुरा कर अपनो गर्दन हिला देता है !पर सर एक आप ही ऐसे इंसान है जो प्रतिदिन मेरे अभिवादन पर मुस्कुरा कर अभिवादन का उत्तर देते थे साथ ही मेरी कुशलक्षेम भी पूछते थे ! आज सुबह भी मेने आपको अभिवादन किया आपने मुस्कुरा कर मेरे अभिवादन का उत्तर दिया और मेरे हालचाल पूछे! मुझे मालूम था की इन दिनों फैक्ट्री में बहुत काम चल रहा है जो आज समाप्त हो जायेगा ! और काम समाप्त भी हो गया सभी लोग अपने अपने घर जाने लगे ! जब सब लोग दरवाजे से निकल गए तो मुझे आप की याद आई की रोज आप मेरे से बात कर के घर जाते थे पर आज दिखी नहीं दिए ! मेने सोचा शायद अंदर काम में लगे होंगे ! पर सब के जाने के बाद भी बहुत देर तक आप बहार आते दिखी नहीं दिए तो मेरे दिल में कुछ शंकाएं उत्पन्न होने लगी ! क्यों की फैक्ट्री के जाने आने का यही एकमात्र रास्ता है इसी लिए में आपको ढूंढते हुए फैक्ट्री के अंदर आ गया ! मेने आपका कक्ष देखा मीटिंग हाल देखा बॉस का कक्ष देखा पर आप कही दिखाई नहीं दिए !मेरा मन शंका से भर गया की आप कहाँ गए ?कोई निकलने का दूसर रास्ता भी नहीं है ! में वापस जाने लगा तो सोचा चलो शीतलीकरण कक्ष भी देख लू ! पर वो बंद था ! में वापस जाने को मुडा पर मेरे दिल ने कहा की एक बार इस शीतलीकरण कक्ष को खोल कर भी देखूं ! में आपात्कालीन चाबियाँ जो मेरे पास रहती है ,से कक्ष खोला तो आपको यहाँ बेहोश पाया !
अखिलेश एक टक शेखर के चहरे की और देखे
जा रहा था उसने सपने में भी नहीं सोचा था की उसकी एक छोटी सी अच्छी आदत का प्रतिफल उसे इतना बड़ा मिलेगा !उसकी आँखों में आंसू भर आये उसने उठ कर शेखर को गले लगा लिया !
अगर दोस्तों इस कहानी में कुछ सार नजर आये तो कोशिश करे की सभी लोग इस कहानी को पढ़ सके और एक अच्छी आदत चाहे वह छोटी सी ही क्यों ना हो अपने जीवन में उत्तर सकें !

मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी हो गई है..

मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी हो गई है..


कुछ जिद्दी, कुछ नक्चढ़ी हो गई है
मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी हो गई है
अपनी हर बात अब मनवाने लगी है
हमको ही अब वो समझाने लगी है
हर दिन नई नई फरमाइशें होती है
लगता है कि फरमाइशों की झड़ी हो गई है
मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी हो गई है
अगर डाँटता हूँ तो आखें दिखाती है
खुद ही गुस्सा करके रूठ जाती है
उसको मनाना बहुत मुश्किल होता है
गुस्से में कभी पटाखा कभी फुलझड़ी हो गई है
मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी हो गई है
जब वो हँसती है तो मन को मोह लेती है
घर के कोने कोने मे उसकी महक होती है
कई बार उसके अजीब से सवाल भी होते हैं
बस अब तो वो जादू की छड़ी हो गई है
मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी हो गई है
घर आते ही दिल उसी को पुकारता है
सपने सारे अब उसी के संवारता है
दुनियाँ में उसको अलग पहचान दिलानी है
मेरे कदम से कदम मिलाकर वो खड़ी हो गई है
मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी हो गई है…
(Source: Whatsapp )

प्रभु की लीला ------ Prabhu Ki Lila

एक बार श्री कृष्ण और अर्जुन भ्रमण पर निकले तो उन्होंने मार्ग में एक निर्धन ब्राहमण को भिक्षा मागते देखा अर्जुन को उस पर दया आ गयी और उन्होंने उस ब्राहमण को स्वर्ण मुद्राओ से भरी एक पोटली दे दी।
जिसे पाकर ब्राहमण ख़ुशी ख़ुशी घर लौट चला। पर राह में एक लुटेरे ने उससे वो पोटली छीन ली।
ब्राहमण दुखी होकर फिर से भिक्षावृत्ति में लग गया।
अगले दिन फिर अर्जुन की दृष्टि जब उस ब्राहमण पर पड़ी तो उन्होंने उससे इसका कारण पूछा।
ब्राहमण की व्यथा सुनकर उन्हें फिर से उस पर दया आ गयी और इस बार उन्होंने ब्राहमण को एक माणिक दिया।
ब्राहमण को उस मछली पर दया आ गयी उसने सोचा”इन दो पैसो से पेट कि आग तो बुझेगी नहीं क्यों न इस मछली के प्राण ही बचा लिए जाये”यह सोचकर उसने दो पैसो में उस मछली का सौदा कर लिया और मछली को अपने कमंडल में डाल दिया।
कमंडल के अन्दर जब मछली छटपटई तो उसके मुह से माणिक निकल पड़ा।
उसने सोचा कि ब्राहमण उसे पहचान गया और अब जाकर राजदरबार में उसकी शिकायत करेगा इससे डरकर वह ब्राहमण से रोते हुए क्षमा मांगने लगा और उससे लूटी हुई सारी मुद्राये भी उसे वापस कर दी।
तब आप ईश्वर का कार्य कर रहे होते हैं।


ब्राहमण उसे लेकर घर पंहुचा और चोरी होने के डर से उसे एक घड़े में छिपा दिया। दिन भर का थका मांदा होने के कारण उसे नींद आ गयी, इस बीच ब्राहमण की स्त्री उस घड़े को लेकर नदी में जल लेने चली गयी और जैसे ही उसने घड़े को नदी में डुबोया वह माणिक भी जल की धरा के साथ बह गया।
ब्राहमण को जब यह बात पता चली तो अपने भाग्य को कोसता हुआ वह फिर भिक्षावृत्ति में लग गया।
अर्जुन और श्री कृष्ण ने जब फिर उसे इस दरिद्र अवस्था में उसे देखा तो जाकर सारा हाल मालूम किया।
सारा हाल मालूम होने पर अर्जुन भी निराश हुए और मन की मन सोचने लगे इस अभागे ब्राहमण के जीवन में कभी सुख नहीं आ सकता।
अब यहाँ से प्रभु की लीला प्रारंभ हुई।
उन्होंने उस ब्राहमण को दो पैसे दान में दिए।
तब अर्जुन ने उनसे पुछा “प्रभु मेरी दी मुद्राए और माणिक भी इस अभागे की दरिद्रता नहीं मिटा सके तो इन दो पैसो से इसका क्या होगा” ?
यह सुनकर प्रभु बस मुस्कुरा भर दिए और अर्जुन से उस ब्राहमण के पीछे जाने को कहा।
रास्ते में ब्राहमण सोचता हुआ जा रहा था कि”दो पैसो से तो एक व्यक्ति के लिए भी भोजन नहीं आएगा प्रभु ने उसे इतना तुच्छ दान क्यों दिया”?
तभी उसे एक मछुवारा दिखा जिसके जाल में एक मछली तड़प रही थी।
ब्राहमण ख़ुशी के मारे चिल्लाने “लगा मिल गया मिल गया ”..!!!
तभी भाग्यवश वह लुटेरा भी वहा से गुजर रहा था जिसने ब्राहमण की मुद्राये लूटी थी।
यह देख अर्जुन प्रभु के आगे नतमस्तक हुए बिना नहीं रह सके।
जब आप दूसरे का भला कर रहे होते हैं,

Sunday, January 25, 2015

अज्ञानता

एक जौहरी था उसके देहांत के बाद उसके परिवार पर बहुत बड़ा सन्कट आ गया।
खाने के भी लाले पड गए
एक दिन उसकी पत्नी न अपने बेटे को एक नीलम का हार दे कर कहा बेटा इसे अपने चाचा की दुकान पर लेकर जाओ और कहना कि इसे बेच कर कुछ रुपए दो
वह उस हार को लेकर चाचा जी के पास गया।
चाचा जी ने हार को अच्छी तरह से देख परख कर कहा कि बेटा अपनी माँ से कहना कि अभी बाज़ार बहुत मन्दा हैं थोड़ा रुककर बेचना अच्छे दाम मिलेगे और थोड़े से रुपये देकर कहा कि तुम कल से दुकान पर आ कर बैठना। 
अगले दिन से वह लड़का रोज दुकान पर जाने लगा और वहां पर हीरो की परख करने लगा
एक दिन वह हीरो का बहुत बड़ा पारखी बन गया लोग दूर दूर से अपने हीरो की परख कराने आने लगे
एक दिन उसके चाचा जी ने कहा कि बेटा अपनी माँ से वह हार लेकर आना और कहना कि अब बाज़ार बहुत तेज है उसके अब अच्छे दाम मिल जाएगे ।
बेटा हार लेने घर गया और मा से हार लेकर परख कर देखा कि यह तो artificial हैं और उसको घर पर ही छोड़ कर वापस लौट आया तो चाचा जी ने पूछा कि हार नहीं लाए तो उसने कहा कि वह हार तो नकली था।
तब चाचा जी ने कहा कि जब पहली बार लेकर आए थे अगर मैं उस समय हार को नकली बताता तो तुम सोचते कि आज हम पर बुरा वक्त आया तो हमारी चीज़ को नकली बताने लगे आज जब तुम्हें खुद ज्ञान हो गया तो पता चल गया कि यह नकली हैं
इससे हमें यही शिक्षा मिलती है कि ज्ञान के बिना इस सन्सार मे हम जो भी सोचते हैं देखते हैं जानते हैं सब गलत है अगर हम दुखि हैं या अभाव ग्रस्त है तो इसका एक ही कारण है अज्ञानता अज्ञान के ही कारण डर हैं सब कुछ पाना आसान है दुर्लभ है सन्सार मे एक यथार्थ ज्ञान।

Thursday, January 22, 2015

Bihar ssc Graduate level exam admit card download



Bihar ssc के Grduate level combined exam का admit card डाउनलोड
 करने के लिए निचे दिए गए लिंक पर क्लिक करे 




 द्वितीय स्नातक स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के प्रवेश पत्र से सम्बंधित आवश्यक सूचना 20-01-2015  
To Download Admit card, please click here.


http://111.118.182.165/BSSCGradAdmitCard/Login.aspx



Wednesday, January 21, 2015

जब आप किसी से रूठकर


जब आप किसी से रूठ कर नफरत से बात करो
 और वो उसका जवाब मोहब्बत से दे 
तो समझ जाना की वो 
आपको खुद से ज्यादा प्यार करता है |









अपनी सोच को हमेशा ऊँचा रखे

एक आदमी ने देखा की एक गरीब बच्चा उसकी कीमती कार को निहार रहा है।
 उसे रहम आ गया और उसने उस बच्चे को अपनी कार में बैठा लिया। 
बच्चा : आपकी कार बहुत महंगी है ना। 
आदमी : हाँ। मेरे बड़े भाई ने मुझे उपहार में दी है।
बच्चा : आपके बड़े भाई कितने अच्छे आदमी हैं।
आदमी: मुझे पता है तुम क्या सोच रहे हो। तुम भी ऐसी कार चाहते हो ना?
बच्चा: नहीं। मै भी आपके बड़े भाई जैसा बनना चाहता हूँ।

 मेरे भी छोटे भाई बहन हैं ना।

"अपनी सोच को हमेशा ऊंचा रखें, दूसरों की अपेक्षाओं से भी कहीं ज्यादा ऊंचा।"

Tuesday, January 20, 2015

पानी की बूंद - PANI KI BUND

                     ''पानी की बूंद गरम तवे पर पड़ जाये तो मिट जाती है ,
                         कमल के पत्ते पर गिरे तो मोती की तरह चमकने लगती  है ,
                         सीप में आये तो खुद मोती ही बन जाती है |
                         पानी की बूंद तो वही है ,बस संगत का फर्क है | ''





Saturday, January 17, 2015

WHEN I DIE DON'T COME NEAR MY BODY


Most touching line said by a best friend--
'' When I die, don't come near my body,
 because my hand may not able to wipe your tears ''

हिन्दी - जब मै  मर जाऊ तो  मेरे शरीर के  नजदीक मत आना ऐ दोस्त ,
क्योंकि मेरे हाथ तुम्हारे आँसू नहीं पोंछ पायेंगे 




Monday, January 12, 2015

आधे अधूरे सच से बचे

एक नाविक तिन साल से एक ही जहाज पर कम कर रहा था . एक रात वह नशे में धुत हो गया |
ऐसा पहली बार हुआ था | कप्तान ने इस घटना को इस तरह दर्ज किया
"नाविक आज रत नशे में धुत था |"
नाविक ने यह बात पढ़ ली | वह जनता था की इस एक वाक्य से उसकी नौकरी पर असर पड़ेगा |
इसलिए वह कप्तान के पास गया , माफ़ी मांगी और कप्तान से कहा की उसने जो कुछ लिखा  है ,
उसमे यह भी जोड़ दे  कि ऐसा तिन साल में पहली बार हुआ है ,क्योकि यही सच्चाई है |
कप्तान ने मना कर दिया और कहा की "मैंने जो कुछ भी रजिस्टर में दर्ज किया है वही असली सच है|"
      अगले दिन रजिस्टर भरने की बारी नाविक की थी |
      उसने लिखा ,'आज की रात कप्तान ने शराब नहीं पी  "
कप्तान ने इसे पढ़ा ,और नाविक से कहा की इस वाक्य को वह या तो बदल दे अथवा पूरी बात लिखने के लिए
आगे कुछ और लिखे , क्योंकि जो लिखा गया था ,उससे जाहिर होता था की कप्तान हर रात शराब पिता है |
नाविक ने कप्तान से कहा जो कुछ रजिस्टर में लिखा है वही सच है |
                                                                                         VIA -YOU CAN WIN 
                                                                                                         SHIV KHEDA
========================================================================
           तो देखा दोस्तों दोनों बाते सही थी ,लेकिन दोनों से जो सन्देश मिलता है, वह एकदम भटकने वाला है | उसमे सच्चाई की कोई झलक नहीं है   
दोस्तों हमारे साथ भी ऐसा होता है हम बिना पूरी बातो को जाने बगैर किसी को सही या गलत मन लेते है | जरुरी नहीं है की सामने जो दिखाई दे रहा है वही पूरा सच हो | अतः बिना पूरा सच जाने कोई भी फैसला लेने से बचे 
                                                                                                                               धन्यवाद