पांच बड़े विवाद जिसके बाद नीतीश कुमार को उठाना पड़ा यह बड़ा कदम

पांच बड़े विवाद जिसके बाद नीतीश कुमार को उठाना पड़ा यह बड़ा कदम 




बिहार में छठी बार मुख्यमंत्री पद के रूप में आज सुबह दस बजे नीतीश कुमार ने राजभवन के मंडपम हॉल में शपथ ली। बिहार में बुधवार को शुरू हुए घटनाक्रम का पटाक्षेप हो गया और एनडीए के साथ मिलकर नीतीश कुमार ने फिर एक बार बिहार में सरकार बनाई है और उपमुख्यमंत्री पद एक बार फिर से भाजपा नेता सुशील मोदी को सौंपा है।उन्होंने यह साफ कर दिया कि किसी भी कीमत पर वे भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति से समझौता नहीं कर सकते हैं। यही वजह है कि जब राजद विधानमंडल दल की बैठक के बाद अंतिम रूप से जब यह तय हो गया कि डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव इस्तीफा नहीं देंगे तो उन्होंने खुद ही इस्तीफा दे दिया। 

इसे जहां एक ओर बिहार के लिए नई दशा और दिशा के रूप में देखा जा रहा है वहीं बिहार में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। नीतीश की घरवापसी की बात कहें तो यह सही है, एक बार जब नीतीश ने बीजेपी की मदद से बिहार में सरकार बनाई थी तो सरकार अच्छी तरह चली थी, लेकिन कुछ मुद्दों के टकराव के बाद नीतीश ने राजद और कांग्रेस के साथ महागठबंधन कर नई सरकार बना ली।

महागठबंधन बन तो गया लेकिन नीतीश को शायद मालूम नहीं था कि वो राजनीतिक रूप से धुर विरोधी रहे जिस लालू यादव से हाथ मिला रहे हैं वो राजद बदला नहीं है और उसकी नीतियां वहीं हैं जो पहले रही थीं जिसका नीतीश ने जमकर विरोध किया था। फिर एक बार उसके साथ मिलकर किसी तरह अपने आपको संयमित करके नीतीश ने बीस महीने सरकार चलाई।

इन बीस महीनों में बिहार के विकास का काम कम और आरोप-प्रत्यारोप वर्चस्व की लड़ाई चलती रही, अपराध चरम पर पहुंच गया, जनता परेशान हो गई। नीतीश ने खुद की बदौलत अपना स्टैंड लेकर कई बड़ी घोषणाएं कीं जिसमें महागठबंधन की पार्टियों ने मन से उनका साथ नहीं दिया। लेकिन कुछ मामलों को लेकर उन्होंने केंद्र सरकार की जमकर तारीफ जो महागठबंधन के नेताओं को नहीं भायी।

राजनीति में स्वार्थ नहीं देश हित जनहित और राज्यहित की सोच वाले नीतीश को अपने खुद के दोस्तों के विरोध का सामना करना पड़ा। विरोध के स्वर फूटने लगे और नीतीश को दबाव का सामना करना पड़ा। नीतीश जो कभी दबाव की राजनीति नहीं करते उन्हें अपने ही लोगों ने अांख दिखाना शुरू कर दिया। 

बिहार में जो विकास की बयार बह रही थी वो राजनीति की बिसात में दब गई और मोहरों ने अपने-अपने घरों में कुचक्र करना शुरू कर दिया। जब पानी सर से ऊपर जाने लगा और नीतीश असहज होने लगे तो उन्होंने राज्य हित में बड़ा फैसला लेते हुए अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंपने का फैसला किया और बिहार के विकास के लिए नीतीश को बीजेपी का साथ मिला। इस तरह एक बार फिर नीतीश की घरवापसी ट्विटर पर ट्रेंड करने लगी।

करीब 20 दिनों से चले आ रहे हैं राजनीतिक कयासों के दौर नीतीश कुमार के इस्तीफे के साथ ही खत्‍म हो गये हैं। अब हम आपको बता रहे हैं वह पांच बड़े विवाद जिसके बाद नीतीश कुमार को यह बड़ा कदम उठाना पड़ा।

पहली घटना  

5 जुलाई को सीबीआइ ने लालू प्रसाद, राबड़ी देवी व तेजस्वी यादव समेत आठ लोगों पर एफआरआइ दर्ज किया। नीतीश कुमार ने तेजस्वी यादव से जनता के बीच तथ्यों पर आधारित स्पष्ट जवाब देने को कहा। लालू प्रसाद ने कहा, तेजस्वी यादव इस्तीफा नहीं देंगे।

दूसरी घटना  

राष्ट्रपति चुनाव में जदयू ने एनडीए उम्मीदवार को समर्थन दिया। इस पर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने कहा, नीतीश ऐतिहासिक भूल कर रहे हैं, अपने फैसले पर पुनर्विचार करें। 

तीसरी घटना

जदयू द्वारा तेजस्वी यादव के इस्तीफे को लेकर दबाव बढ़ा तो राजद ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की छवि पर हमला किया। राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह कहा, भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का ढोंग कर रहे हैं नीतीश। राजद के इस हमले को जदयू ने अपने नेता का अपमान माना। जदयू-राजद के बीच तल्खी और बढ़ी। छवि को लेकर बेहद संवेदनशील रहने वाले नीतीश कुमार के लिए महागठबंधन को चलाना मुश्किल हो गया।

चौथी घटना

एनडीए के विरुद्ध विपक्ष की एकजुटता को लेकर राजद ने 27 अगस्त को गांधी मैदान में भाजपा भगाओ रैली की एकतरफा घोषणा की। इससे भी जदयू-राजद के बीच दूरी बढ़ी। 

पांचवी घटना

नीतीश कुमार को लेकर कांग्रेस ने भी तंज कसा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री अखिलेश सिंह ने कहा, कांग्रेस को नीतीश की जरूरत नहीं। इससे भी महागठबंधन में दूरी बढ़ी। 



राज्‍यपाल से मिलने पहुंचे सीएम नीतीश, दिया इस्‍तीफा


राज्‍यपाल से मिलने पहुंचे सीएम नीतीश, दिया इस्‍तीफा





 




राज्‍यपाल से मिलने पहुंचे सीएम नीतीश, दिया इस्‍तीफा

बुधवार को राजद के बाद जदयू विधानमंडल दल की बैठक हो रही है। इस बीच बताया जा रहा है कि सीएम नीतीश कुमार ने बड़ा फैसला लिया है। उन्‍होंने राज्‍यपाल से मिलने का समय मांगा है।




 बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने चल रहे सियासी सरगर्मी के बीच इस्‍तीफा दे दिया है। उन्‍होंने यह साफ कर दिया कि किसी भी कीमत पर वे भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति से समझौता नहीं कर सकते हैं। यही वजह है कि जब राजद विधानमंडल दल की बैठक के बाद अंतिम रूप से जय हो गया कि डिप्‍टी सीएम तेजस्वी यादव इस्‍तीफा नहीं देंगे तो उन्होंने खुद इस्तीफा दे दिया। इसके बाद वे मीडिया से रूबरू हैं।

गौरतलब है कि नीतीश कुमार ने पार्टी विधानमंडल की बैठक 28 जुलाई को बुलाई थी, लेकिन राजद का रुख देखते हुए इसके समय में परिवर्तन किया। बुधवार शाम को हुई इस बैठक में मंत्रिमंडल भंग करने व नीतीश कुमार के इस्‍तीफे का फैसला लिया गया।

सरकार को लेकर अंतिम निर्णय पर आने के बाद मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्‍यपाल से मिलने का वक्‍त मांगा। इसके बाद उन्‍होंने राज्‍यपाल से मिलकर अपने निर्णय से उन्‍हें अवगत कराया।

नीतीश ने कहा


- इस बाबत नीतीश कुमार ने कहा कि उन्‍होंने जितना संभव हुआ, गठबंधन धर्म का पालन करते हुए जनता से किए वायदे पूरे किए।

- हमने तेजस्‍वी का कभी इस्‍तीफा नहीं मांगा। लालू जी से बातचीत होती रही है। तेजस्‍वी भी मिले। हमने कहा कि जो भी आरेाप लगे हैं, उसे एक्‍सप्‍लेन कीजिए। आम जन के बीच जो अवधारना बन रही है, उसके लिए यह जरूरी है। वो नहीं हुआ।

- राहुल जी से भी बातत की। बिहार में भी कांग्रेस के लोग हैं, उनसे भी कहा।

- ऐसी परिस्थिति बनी कि काम करना संभव नहीं हो रहा था।

-हमने अपनी बात कह दी थी, अब उनको करना था।

- वीां अपेक्षा थी कि हम संकट में हैं तो हमारी रक्षा कीजिए। यह कोई संकट नहीं है, अपने आप बुलाया गया संकट है।

- जबतक चला सकते थे चला दिया, अब ये मेरे स्‍वभाव व काम करने के तरीकों के अनुकूल नहीं है।


विदित हो कि सीबीआइ की एफआइआर में नामजद डिप्‍टी सीएम तेजस्‍वी यादव के इस्‍तीफे को लेकर भाजपा ने विधानमंडल के मॉनसून सत्र को बाधित करने का अल्‍टीमेटम दिया था। जदयू ने भी कई बार मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के भ्रष्‍टाचार के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की बात कही। उधर, राजद ने साफ कर दिया था कि तेजस्‍वी किसी भी स्थिति में इस्‍तीफा नहीं देने जा रहे हैं। ऐसे में उनके पास खुद इस्‍तीफा देने या तेजस्‍वी को बर्खास्‍त करने का विकल्‍प था।

साभार -जागरण 

RAMNATH KOVIND BIOGRAPHY IN HINDI


रामनाथ कोविंद (RAMNATH KOVIND)

भारत के तत्कालीन  राष्ट्रपति 

(PRESIDENT OF INDIA)



केआर नारायणन के बाद दलित समुदाय से देश के दूसरे राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि एक छोटे से गांव में मिट्टी के घर में पले-बढ़े और उनकी यात्रा बहुत लंबी रही है। यह यात्रा अकेले उनकी नहीं बल्कि हमारे देश और समाज की यही गाथा रही है। कोविंद ने कहा कि सवा सौ करोड़ नागरिकों ने जो विश्वास उन पर जताया है उस पर खरा उतरने का वचन देते हैं। साथ ही डा राजेंद्र प्रसाद, डा सर्वपल्ली राधाकृष्णन, एपीजे अब्दुल कलाम और अपने पूववर्ती प्रणब मुखर्जी के पदचिन्हों पर चलने का भी भरोसा देते हैं।


जानिए  रामनाथ कोविन्द जी के बारे में ...



राम नाथ कोविन्द भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेताओं में से एक हैं। हैं। वह राज्यसभा सदस्य और बिहार के राज्यपाल भी रह चुके हैं। इस समय वह भारत के 14 राष्ट्रपति   हैं।

रामनाथ कोविंद का जीवन परिचय 

राम नाथ कोविंद का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की (वर्तमान में कानपुर देहात जिला), तहसील डेरापुर के एक छोटे से गांव परौंख में  1 अक्टूबर 1945 को   हुआ था. कोविंद का सम्बन्ध कोरी या कोली जाति से है जो उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति के अंतर्गत आती है.

दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस


 कानपुर विश्वविद्यालय से एलएलबी करने के बाद श्री कोविन्द ने दिल्ली हाईकोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट में करीब 16 वर्ष सन् 1993 तक वकालत की।वकील रहने के दौरान कोविंद ने गरीब दलितों के लिए मुफ़्त में क़ानूनी लड़ाई लड़ी।

संसदीय जीवन

 इनका संसदीय जीवन भी सुदीर्घ रहा। सन् 1994 में उत्तर प्रदेश से निर्वाचित होकर राज्यसभा गये और अगले बारह वर्ष, मार्च 2006 तक संसद के उच्च सदन में रहे। संयुक्त राष्ट्रसंघ में भी इन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया और अक्टूबर 2002 में संयुक्त राष्ट्र संघ को संबोधित किया। भारतीय जनता पार्टी में भी लम्बे समय तक राष्ट्रीय संगठन में प्रमुख भूमिका निभाई। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और दलित प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में अपनी पहचान इन्होंने बड़ी की। वह भाजपा दलित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अखिल भारतीय कोली समाज अध्यक्ष भी रहे। वर्ष 1986 में दलित वर्ग के कानूनी सहायता ब्युरो के महामंत्री भी रहे।

कई कमेटियों के रह चुके है  चेयरमैन

आदिवासी, होम अफ़ेयर, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, सामाजिक न्याय, क़ानून न्याय व्यवस्था और राज्यसभा हाउस कमेटी के भी चेयरमैन रहे। कोविंद गवरनर्स ऑफ इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के भी सदस्य रहे हैं। 2002 में कोविंद ने संयुक्त राष्ट्र के महासभा को भी संबोधित किया था। इसके अलावा वो बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी रह चुके हैं।

घाटमपुर से लड़ चुके हैं लोकसभा चुनाव

कोविंद को पार्टी ने वर्ष 1990 में घाटमपुर लोकसभा सीट से टिकट दिया लेकिन वह चुनाव हार गए. वर्ष 1993 व 1999 में पार्टी ने उन्हें प्रदेश से दो बार राज्यसभा में भेजा. पार्टी के लिए दलित चेहरा बन गये कोविंद अनुसूचित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रवक्ता भी रहे.

घाटमपुर से चुनाव लड़ने के बाद कोविंद लगातार क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं से संपर्क में रहे. राज्यसभा सदस्य के रूप में क्षेत्र के विकास में लगातार सक्रिय रहने का ही परिणाम है कि उनके राज्यपाल बनने की खबर सुनते ही लोग फोन पर बधाई देने लगे.

वर्ष 2007 में पार्टी ने उन्हें प्रदेश की राजनीति में सक्रिय करने के लिए भोगनीपुर सीट से चुनाव लड़ाया, लेकिन वह यह चुनाव भी हार गए.

आईएएस परीक्षा में तीसरे प्रयास में मिली थी सफलता


परौख गांव में 1945 में जन्मे रामनाथ कोविद की प्रारंभिक शिक्षा संदलपुर ब्लाक के ग्राम खानपुर परिषदीय प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय हुई. कानपुर नगर के बीएनएसडी इंटरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद डीएवी कॉलेज से बी कॉम व डीएवी लॉ कालेज से विधि स्नातक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद दिल्ली में रहकर आईएएस की परीक्षा तीसरे प्रयास में पास की.


अाईएएस एलाइड सेवा के लिए चुने गए


मुख्य सेवा के बजाय एलायड सेवा में चयन होने पर नौकरी ठुकरा दी. जून 1975 में आपातकाल के बाद जनता पार्टी की सरकार बनने पर वे वित्त मंत्री मोरारजी देसाई के निजी सचिव रहे थे. जनता पार्टी की सरकार में सुप्रीम कोर्ट के जूनियर काउंसलर के पद पर कार्य किया.

बेदाग छवि और कानून के बड़े जानकार हैं कोविन्द


एनडीए के राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी व बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविन्द की छवि बेदाग और निष्पक्ष तथा निरपेक्ष है। कानून के वे बड़े जानकार हैं। 8 अगस्त 2015 को बिहार के राज्यपाल के रूप में उनकी नियुक्ति हुई थी और 16 अगस्त को उन्होंने पदभार संभाला था। करीब 22 महीने के कार्यकाल में इन्होंने राज्य सरकार से आदर्श और गरिमापूर्ण संबंध बनाए रखा। न सत्तापक्ष, न विपक्ष किसी की इनसे कोई शिकायत नहीं रही। गंभीर व ज्वलंत मुद्दों को भी इन्होंने बहुत ही सरल ढंग से सुलझाया। राज्यपाल के रूप में श्री कोविन्द ने एक मिसाल कायम की तथा अपनी बेहतरीन छवि बनायी।

सरकार के रचनात्मक फैसलों के साथ खड़े रहे 


 बिहार के राज्यपाल के रूप में रामनाथ कोविन्द विकास के तमाम प्रयासों में राज्य सरकार के साथ खड़े रहे। उनके पद संभालने के तीन माह बाद ही बिहार में विधानसभा का शांतिपूर्ण चुनाव हुआ। उन्होंने चौथी बार मुख्यमंत्री बनने वाले नीतीश कुमार तथा उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों को गांधी मैदान में शपथ दिलायी। उसके बाद से सरकार के सभी रचनात्मक विधेयक और अध्यादेश पर अपनी मुहर लगायी। कभी सरकार तथा राजभवन के बीच गतिरोध या टकराव की स्थिति नहीं दिखी। वहीं, चांसलर के रूप में भी श्री कोविन्द ने राज्य के विश्वविद्यालयों में कई कारगर हस्तक्षेप किये, जिनमें से कई हस्तक्षेपों के परिणाम भी सामने आने लगे हैं।

’ राज्य सरकार के शराबबंदी के फैसले के साथ खड़े रहे। इसके लिए बने कानून पर मुहर लगायी। शराबबंदी को लेकर ऐतिहासिक मानव श्रृंखला की तारीफ की तथा शराबबंदी को सामाजिक परिवर्तन की दिशा में बिहार सरकार की कारगर पहल करार दिया’ राज्य सरकार के परामर्श से सर्च कमेटी की अनुशंसा पर राज्य के विश्वविद्यालयों में कुलपति और प्रतिकुलपतियों की नियुक्ति की ’ बिहार विश्वविद्यालय अधिनियम में संशोधन को हरी झंडी दी। इससे राज्य में दो नये पाटलिपुत्र और पूर्णिया विश्वविद्यालय की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ’ विकास पर चर्चा के लिए विधानमंडल सत्र के दौरान हर सुबह एक- एक प्रमंडल के विधायकों से मिलने की परंपरा शुरू की। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी ऐसी हर बैठक में मौजूद रहे

योगासन और घंटे भर की सैर से शुरू होती है दिनचर्या


एनडीए द्वारा राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी घोषित किए गए बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद की दिनचर्या अहले सुबह घंटेभर की सैर से शुरू होती है। फिर इतनी ही देर वह विपश्यना और योग करते हैं। इसके बाद सहज-सुलभ कोविन्द आम लोगों से मिलते हैं।सुबह दस बजे के करीब नियमित रूप से राजभवन के ऊपरी तल से नीचे दफ्तर में बैठते हैं और सात-आठ मुलाकातियों से मिलते हैं। मुलाकातियों में राजनीतिक कार्यकर्ता, विद्वान, कलाकार, कवि, साहित्यकार समेत विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोग, जिसने भी मिलने की इच्छा जताई, आग्रह पत्र भेजा उन्हें निश्चित समय मिलता है। राजधानी पटना समेत राज्य के हर हिस्से में अधिकाधिक कार्यक्रमों में शामिल होना उनका शगल था। कैमूर, जहानाबाद, मुंगेर, गया समेत प्राय: सभी प्रमुख शहरों के समारोहों में वे गए। विशुद्ध रूप से शाकाहारी भोजन, वह भी बिना मसाला, तेल का। चाय भी ग्रीन टी, बिना शक्कर के लेते हैं। आयोजकों को साफ निर्देश रहता था कि वे छाछ और नारियल पानी ही लेंगे। रात दस बजे सोने के लिए जाते हैं और सुबह पांच-साढ़े पांच बजे उठते हैं। पढ़ने की भी खूब आदत है। व्यक्तित्व केंद्रित किताबें उनकी टेबल पर हमेशा रहती हैं।

देश के पहले राष्ट्रपति की परपोती है ‘रॉकस्टार और तनु वेड्स मनु’ की ये एक्ट्रेस

श्रेया नारायण (SHREYA NARAYAN)
BOLLYWOOD ACTRESS





फिल्म एक्ट्रेस के साथ साथ एक लेखिका एवं समाज सेविका भी

जैसा कि हम सभी जानते है की भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र थे. डॉ राजेंद्र प्रसाद बिहार के रहने वाले थे.कई सारी बातें लोगों को उनके बारे में पता है. लेकिन ये बातें शायद ही लोगों को मालूम होगा कि उनके परिवार की एक बेटी बॉलीवुड एक्ट्रेस हैं. जी हाँ, हम बात कर रहे है बॉलीवुड एक्ट्रेस श्रेया की. जिन्होंने ‘साहेब बीवी और गैंगस्टर’ जैसी फिल्मों में किरदार निभाया है. श्रेया का जन्म मुजफ्फरपुर में हुआ. श्रेया को तिग्मांशु धुलिया की फिल्म ‘साहेब बीवी और गैंगस्टर’ में महुआ के रोल से पहचान मिली थी. श्रेया फिल्म एक्ट्रेस के साथ साथ एक लेखिका एवं समाज सेविका भी हैं.




कई फिल्मो में किया है काम


श्रेया ने अपना करियर सोनी टीवी पर आने वाले शो ‘पावडर’ से शुरूआत की. इसके साथ साथ श्रेया ने कई बॉलीवुड फिल्मों में भी काम किया है हैसे एक दस्तक, नॉक आउट, रॉकस्टार, राजनीति सुपर नानी, तनु वेड्स मनु.



साहेब बीवी और गैंगस्टर से मिली पहचान


लेकिन उन्हें फिल्मी जगत में सफलता 2011 में आयी तिगमांशु धूलिया की फिल्म साहेब बीवी और गैंगस्टर फिल्मों से मिली. हाल ही में आयी फिल्म ‘सुपर नानी’ में उन्होंने दिमागी तौर पर बीमार लड़की का किरदार निभाया था. इसी के साथ श्रेया ने कोसी नदी बाढ़ के समय प्रकाश झा के साथ बिहार बाढ़ राहत मिशन में भी काम किया था. श्रेया की मां कैंसर से पीड़ित थीं, जिसकी वजह से उनकी मौत हो गई थी. एसे में श्रेया ने थिएटर के सहारे ही अपने जीवन को एक नई दिशा दी और फिल्मी जगत में उन्होंने अपना करियर शुरू किया. श्रेया का कहती है कि जब तक आप फिल्म इंडस्‍ट्री में कुछ बन नहीं जाते, तब तक आपका शोषण होता रहता है.




बॉलीबुड की है बोल्ड एक्ट्रेस

श्रेया नारायण बॉलीबुड की एक बोल्ड एक्ट्रेस मानी जाती हैं. श्रेया का कहना है कि कलाकार अलग-अलग तरह के किरदार निभाते हैं तो आपको ऐसा तरीका मिल जाता है, जिससे आप अपनी शख़्सियत को किसी फ़िल्मी किरदार में ढालकर उसे फ़िल्म ख़त्म होने के बाद छोड़ सकते हैं.




थियेटर करने से मिलती है ख़ुशी


बचपन को याद करते हुए वे आगे कहती हैं कि जब मैं अपनी मां से मिलने अस्पताल जाती थी तो मैं एक ज़िम्मेदार बेटी होती थी और जब मैं उन्हें छोड़कर शूटिंग पर जाती थी तो मैं बस वह किरदार बन जाती थी, जिसे मैं निभा रही होती थी। ऐसा करने से आप अपनी भावनाओं पर पूरी तरह नियंत्रण रख पाते हैं.





श्रेया ने एक इंटरव्यू में कहा था कि थिएटर ने उन्हें उनकी पहचान और खुशी दिलाई, क्योंकि वह बचपन में एक नाखुश बच्चे की जिंदगी जी रही थीं.


साभार -Daily bihar News ,shreyanarayan

लाखो की नौकरी छोड़ करोड़ों लोगो की थाली में भोजन परोसने वाला मसीहा

नारायण कृष्णन
(सामाजिक कार्यकर्ता )

नारायण कृष्णन अपने माता-पिता से मिलने के लिए मदुरै गए,

 वहां उन्होंने देखा कि भूख से व्याकुल एक वृद्ध आदमी 

अपना मलमूत्र ही खा रहा था 

उस वाकये को याद करते हुए कृष्णन बताते हैं कि 

यह वाकई मुझे इतना दुख पहुँचाया कि

 मैं सचमुच कुछ समय के लिए स्तब्ध रह गया। 

फिर मैंने उस आदमी को खिलाया और फैसला किया कि

 अब मैं अपने जीवनकाल के बाकी समय जरुरतमंदों की सेवा के लिए ही दूँगा


Narayan krishanan


हीरो एक ऐसा मजबूत शब्द है जिसका इस्तेमाल वैसे लोगों के लिए किया जाता है जो औरों से कुछ अलग करते हैं। हालांकि हर लोगों के लिए हीरो के मायने भी अलग-अलग होते लेकिन कायदे से  असली हीरो वही है जो दूसरों की सलामती और समाज सेवा के भाव से कुछ अनूठा काम करने की हिम्मत रखता है।

15 वर्षों से उन्होंने करोड़ों लोगो को खिला रहे है खाना 

आज की मतलबी दुनिया में जहाँ लोग अपने माता-पिता तक के त्याग और बलिदान को भूल जाते हैं तो दूसरों के लिए खुद के त्याग की बात करने का कोई औचित्य ही नहीं है। लेकिन आज भी हमारे समाज में ऐसे कुछ लोग हैं जिन्होंने समाज सेवा के भाव से अपना जीवन न्योछावर कर दिया है। 34 वर्षीय नारायण कृष्णन इन्हीं लोगों में एक हैं। पिछले 15 वर्षों से उन्होंने करोड़ों बेघर, अनाथ और भूखे लोगों की थाली में भोजन परोसा है।


एक वाकये ने जिंदगी बदल कर रख दी

दरअसल नारायणन कृष्णन प्रतिष्ठित ताज होटल में बतौर शेफ अपने कैरियर की शुरुआत की थी और फिर उन्हें स्विट्जरलैंड में एक पांच सितारा होटल में काम करने का न्योता मिला। इन सबों के बीच साल 2002 में हुए एक वाकये ने उनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल कर रख दी। यूरोप रवाना होने से पहले, वह अपने माता-पिता से मिलने के लिए मदुरै गए, वहां उन्होंने देखा कि भूख से व्याकुल एक वृद्ध आदमी अपना मलमूत्र ही खा रहा था।
उस वाकये को याद करते हुए कृष्णन बताते हैं कि यह वाकई मुझे इतना दुख पहुँचाया कि मैं सचमुच कुछ समय के लिए स्तब्ध रह गया। फिर मैंने उस आदमी को खिलाया और फैसला किया कि अब मैं अपने जीवनकाल के बाकी समय जरुरतमंदों की सेवा के लिए ही दूँगा।


Narayan krishanan

अक्षय  नाम से  सामाजिक संगठन की शुरुआत 

इसी विचार के साथ कृष्णन ने विदेश जाने के अपने फैसले को अलविदा कर ‘अक्षय’ नाम से एक सामाजिक संगठन की शुरुआत की। इस संगठन का एकमात्र उद्येश्य था कोई भी गरीब भूखा नहीं सोए।

भिखारियों के बाल तक खुद ही काटते है 

कृष्णन रोजाना सुबह चार बजे उठकर अपने हाथों से खाना बनाते हैं, फ़िर अपनी टीम के साथ वैन में सवार होकर मदुरै की सड़कों पर करीब 200 किमी का चक्कर लगाते हैं तथा जहाँ कहीं भी उन्हें सड़क किनारे भूखे, नंगे, पागल, बीमार, अपंग, बेसहारा, बेघर लोग दिखते हैं वे उन्हें खाना खिलाते हैं। रोजाना उनकी टीम दिन में दो बार चक्कर लगाती है और करीब 400 लोगों को खाना खिलाती। इतना ही नहीं साथ-साथ वे भिखारियों के बाल काटना और उन्हें नहलाने का काम भी कर डालते हैं।

 रोजाना 20 हजार रुपए होते है  खर्च 

इस कार्य के लिए कृष्णन को रोजाना 20 हजार रुपए का खर्च उठाना पड़ता है। डोनेशन से मिलने वाला पैसा करीब 22 दिन ही चल पाता है जिसके बाद बाकि के दिनों का खर्च वे स्वयं ही उठाते हैं। वे अपने घर के किराये को भी गरीबों का पेट भरने में इस्तेमाल करते हैं। और खुद ट्रस्ट के किचन में अपने कर्मचारियों के साथ ही सोते हैं।

एक करोड़ से भी ज्यादा लोगों को खिला चुके है खाना 

34 वर्षीय कृष्णन अब तक मदुरई के एक करोड़ से भी ज्यादा लोगों को सुबह का नाश्ता, दोपहर का भोजन और रात का खाना खिला चुके हैं। वह नि:स्वार्थ भाव से जनसेवा में लगे हुए हैं। ऐसे समाज सेवकों पर देश को गर्व है।

कांवड़ियों की सेवा करने आगे आया किन्नर समुदाय

कांवड़ियों की सेवा करने आगे आया किन्नर समुदाय, जूठे बर्तन भी किए साफ 





बिहार के सुल्तानगंज से बाबाधाम के बीच एक ऐसा सेवा शिविर है जहां इसके संचालन से लेकर खाना बनाने और भक्तों की सेवा करने वाले सभी किन्नर समुदाय के लोग हैं। आइए जानते हैं किन्नरों के द्वारा किए जा रहे बाबा के भक्तों की सेवा के बारे में कुछ ऐसी बातें जिससे सभी भक्त कर रहे हैं उनकी तारीफ... 

कांवडियों के जूठे बर्तन भी करते हैं साफ 

आज 21वीं सदी में भी समाज के लोग किन्नरों को हीन भावना से देख रहे हैं। पर बीते कुछ समय में किन्नरों द्वारा कुछ ऐसा काम किया गया है जिससे समाज में एक अनोखा मिसाल कायम हुआ है। इसी तरह का एक मिसाल किन्नरों द्वारा कांवरियों की सेवा करके पेश किया जा रहा है। जहां भूखे कांवरियों को खाना खिलाने तथा उनका जूठा बर्तन धोने के साथ-साथ उनकी सेवा करने वाली सभी किन्नर है। जो कई वर्षों से सावन के महीने में भक्तों की सेवा करता है। ये सभी किन्नर छत्तीसगढ़ के दुर्ग के रहने वाले हैं।


 भोलेनाथ के आशीर्वाद से काफी पैसा कमाया 

सेवा आश्रम में भक्तों की सेवा कर रही एक किन्नर शिवानी यादव से जब इस विषय में बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि आज से नहीं बल्कि पिछले 22 सालों से मैं सावन के महीने में बाबा के दरबार जाया करती हूं। अब हम लोगों ने सावन के महीने में भक्तों की सेवा करने का फैसला किया है जो पिछले कई सालों से लगातार किया जा रहा है और लोगों के द्वारा काफी सराहा भी जा रहा है। हम लोगों का मानना यही है कि पैसा तो भोलेनाथ के आशीर्वाद से हम लोगों ने बहुत कमाया अब इसी पैसे को भक्तों के बीच खर्च कर हम लोगों को काफी खुशी मिलती है | वहीं इस शिविर में सेवा कर रही आप्ती वर्मा का कहना है कि इस सेवा से जो आत्मबल मिलता है वह और किसी से नहीं मिलता।

 सेवा भाव देखकर कांवड़िए चकित 

दूसरी तरफ किन्नरों के शिविर में ठहरे कांवड़िए भी इनके शिविर और सेवा करने के भाव को देख चकित है। कावंड़ लेकर बाबा के दरबार जा रहे कांवड़ियां अनिल गोयल और इला गोयल का कहना है कि कुदरत के द्वारा इनके साथ नाइंसाफी हुई है। लेकिन हम लोग इन्हें इंसान मानते हैं और इनकी इस आस्था को देख हम ही नहीं बल्कि अधिकांश कावड़िएं चकित है और सभी उनकी तारीफ कर रहे हैं।

साभार -ONEINDIA

पिता की ख्वाहिश वर्ल्ड कप जीतकर लौटे हरमनप्रीत कौर

मैं खुद को साबित करना चाहती थी: हरमनप्रीत कौर




वुमंस वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में भारत ने 6 बार के चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को 36 रन से हरा दिया। पंजाब के मोगा की हरमनप्रीत कौर ने 171 रन की पारी खेली। इसमें हरमनप्रीत कौर ने 20 चौके और 7 छक्के लगाए। हरमन अब तक 73 वन-डे और 68 टी -20 मैच खेल चुकी हैं। 
चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरी हरमनप्रीत ने 115 गेंदों में 20 चौके और 7 छक्के लगाकर नाबाद 171 रन की अविश्वसनीय पारी खेलते हुये भारत को 42 ओवर के मैच में 281 के विशाल स्कोर तक पहुंचाया था। इस मैच में गेंदबाजों ने भी जबरदस्त खेल दिखाते हुये आस्ट्रेलिया को 245 पर ढेर कर फाइनल में जगह बना ली जहां वह खिताब के लिये इंग्लैंड से भिड़ेगी।

प्लेयर ऑफ द मैच बनीं 

28 वर्षीय हरमनप्रीत ने मैच के बाद कहा पूरे टूर्नामेंट में मुझे ठीक से बल्लेबाजी करने का मौका नहीं मिला। लेकिन जब इस मैच में मेरे पास मौका आया तो मैं इसका पूरा फायदा उठाना चाहती थी और खुद को साबित करना चाहती थी। बल्लेबाज ने साथी खिलाड़ियों की भी उनकी पारियों और मदद के लिये प्रशंसा की। उन्होंने कहा मैं भगवान का धन्यवाद करना चाहती हूं कि मैंने जैसा सोचा वैसा ही हो पाया। मिताली राज और वेदा कृष्णामूर्ति ने भी बहुत ही अच्छी पारियां खेलीं और दीप्ति ने भी मुझे सहयोग किया।


पहली भारतीय महिला बल्लेबाज

हरमनप्रीत पहली भारतीय महिला बल्लेबाज भी हैं जिन्हें आस्ट्रेलिया की मशहूर बिग बैश लीग और किया सुपर लीग में खेलने का मौका मिला। हालांकि टूर्नामेंट में वह अब तक खुद को साबित नहीं कर सकीं क्योंकि मध्यओवरों में उन्हें पांच पारियों में केवल 91 गेंदे ही खेलने का मौका मिल सका था। लेकिन सेमीफाइनल में उन्होंने अपने करियर के तीसरे शतक से भारत को फाइनल का टिकट दिलाकर सारी कसर पूरी कर ली।

होना  चाहिए लड़कियों का सशक्तिकरण 

हरमनप्रीत की मां ने मैच के बाद कहा, ‘लड़कियों का सशक्तिकरण होना ही चाहिए। कोख में उनकी हत्या नहीं की जानी चाहिए। मेरी बेटी ने पूरे देश का सम्मान बढ़ाया है बाकी लड़कियों को भी इससे बढ़ावा मिलेगा।’ हरमनप्रीत के पिता हरमिंदर सिंह ने कहा, ‘मैं चाहता हूं कि वो फाइनल में और बेहतर करे और खिताब जीतकर देश का सम्मान बढ़ाए।’

कोहली जैसी काफी आक्रामक हैं हरमनप्रीत कौर, बहन ने खोले राज

भारत मां का सीना गर्व से चौड़ा करने वाली क्रिकेटर हरमनप्रीत कौर टीम इंडिया (मेल) के कैप्टन विराट कोहली की तरह काफी आक्रामक हैं। ये कहना हमारा नहीं बल्कि हरमनप्रीत की बहन हेमजीत कौर का है। जिन्होंने ये भी बताया कि हरमनप्रीत के, भारत के पूर्व विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग, फेवरेट प्लेयर हैं और इसी कारण वो भी सहवाग की तरह विस्फोटक बैटिंग करना पसंद करती हैं।अपनी बहन की कामयाबी पर गौरवान्वित होने वाली हेमजीत की आंखें खुशी से हर बार उस वक्त छलछला उठती हैं, जब वो अपनी जान से प्यारी और देश के गौरव हरमनप्रीत की बातें करती है। प्यार से हरमनप्रीत को हैरी कहने वाली हेमजीत खुद एक स्कूल टीचर है।


परिवार का सीना फक्र से चौड़ा

साधारण परिवार में जन्मी असाधारण प्रतिभा की धनी हरमप्रीत के पिता हरमंदर भुल्लर मोगा में एक वकील के यहां मुंशी हैं और हरमन खुद भी मुंबई रेलवे में चीफ ऑफिस सुपरिटेडेंट की पद पर तैनात हैं। आज हरमन के घर पर लोगों की बधाई देने वालो का तांता लगा हुआ है, जिसे देखकर, बूढ़े दादा अमरसिंह जिनकी उम्र 91 साल है, का सीना फक्र से चौड़ा हो जाता है।


भारत की जीत की कामना


अब हरमन की तरह उनके घरवाले भी यही सोच रहे हैं कि भारत अंग्रेजों को फाइनल में बुरी तरह हराये और विश्वकप का खिताब अपने नाम करे। ऊपर वाले से प्रार्थना कर रहे मोगा के हर परिवार का सदस्य अब केवल भारत की जीत की कामना कर रहा है।


ट्वीटर पर  लगा बधाई देने वालों का  तांता

 आइए आपको बताते हैं कि किस किसने कौर को बधाई दी और बधाई में उन्होंने कौर के लिए क्या कहा।
 भारत के पूर्व खिलाड़ी बिशन सिंह बेदी ने कौर की तारीफ करते हुए लिखा, ”हरमनप्रीत कौर ने बेहतरीन शॉट खेले, कौर ने कपिल देव की याद दिला दी। शानदार प्रयास।

 भारत के पूर्व विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने लिखा, ”एक ऐसी पारी जो जिंदगी भर याद रहेगी। आपने भारतीय टीम से के स्कोर में 60 फीसदी से ज्यादा रन आपके। अब सब गेंदबाजों के ऊपर।
वहीं आर श्रीधर ने लिखा, ”किसी भी विश्व कप की सबसे बेहतरीन पारी, फिर चाहे वो पुरुष टीम हो या फिर महिला टीम।
भारतीय टीम के खिलाड़ी मोहम्मद कैफ ने लिखा, ”42 ओवरों में 281 रन का स्कोर शानदार है। हरमनप्रीत कौर ने किसी भी विश्व की अपनी जिंदगी की सबसे यादगाप पारी खेली है। शानदार।”

कौर की शानदार पारी की बदौलत टीम इंडिया ने 42 ओवरों में 4 विकेट खोकर 281 रन बनाए। कौर ने लाजवाब बल्लेबाजी की और 115 गेंदों में नाबाद 171 रनों की पारी खेली। कौर ने अपनी पारी में 20 चौके और 7 छक्के लगाए। कौर के अलावा मिताली राज ने (36), दीप्ति शर्मा ने (25) रनों की पारी खेली। इसके अलावा कौर भारत की तरफ से किसी भी विश्व कप में सर्वोच्च रन बनाने वाली खिलाड़ी बन गईं। कौर अंत तक आउट नहीं हुईं नाबाद पवेलियन लौटीं।. .

मुलायम स‍िंह यादव बन सकते हैं बि‍हार के राज्‍यपाल

मुलायम स‍िंह यादव बन सकते हैं बि‍हार के राज्‍यपाल, रामनाथ कोव‍िंद को वोट देने का इनाम देगी नरेंद्र मोदी सरकार


mulayam singh yadav

डिसक्लेमर -  इस खबर का सच से कोई लेना-देना नहीं है। इसे बस मजे लेने के लिए पढ़ें।


बेटे के हाथों तख्‍तापलट का श‍िकार हुए सपा के पुरोधा मुलायम स‍िंंह यादव अब घर-बार, राज्‍य छोड़ कर पटना में बस सकते हैं। बताया जाता है क‍ि अपने राजनीतिक जीवन का अंत‍िम समय अब वह ब‍िहार में ही गंगा क‍िनारे काटेंगे। इस बात की पूरी चर्चा है क‍ि वह राज्‍यपाल बन कर ब‍िहार के राजन‍िवास में रहने जा रहे हैं। ब‍िहार के गवर्नर का पद रामनाथ कोव‍िंद को राष्‍ट्रपति उम्‍मीदवार बनाने के बाद खाली हो गया है।

रामनाथ कोव‍िंद को वोट देने का इनाम देगी नरेंद्र मोदी सरकार

अभी पश्चिम बंगाल के राज्‍यपाल को ब‍िहार की अत‍िर‍िक्‍त ज‍िम्‍मेदारी दे गई है। लेकिन, माना जा रहा है क‍ि जल्‍द ही यह दाय‍ित्‍व मुलायम स‍िंह को सौंप द‍िया जाएगा। बताया जा रहा है कि मुलायम और उनके समर्थक सांसदों ने राष्‍ट्रपति चुनाव में एनडीए के उम्‍मीदवार रामनाथ कोव‍िंद को वोट द‍िया है। नरेंद्र मोदी सरकार उनके इस ‘अहसान’ और उम्र का ख्‍याल रखते हुए कोव‍िंद द्वारा खाली की गई कुर्सी उन्‍हें सौंपने का मन बना रही है।

लालकृष्‍ण आडवाणी ने  सुझाया मुलायम का नाम 

गवर्नर का फैसला लेने के ल‍िए प्रधानमंत्री अपने करीबी सलाहकारों के साथ कई बैठकें कर चुके हैं। इन बैठकों पर नजर रखने वाले एक सूत्र ने कहा क‍ि भाजपा मार्गदर्शक मंडल के प्रमुख लालकृष्‍ण आडवाणी ने मुलायम का नाम आगे बढ़ाया। उनका तर्क था क‍ि सबको हक है क‍ि उसका अंतिम वक्‍त शांति और सुकून से बीते। भले ही उन्‍हें यह मौका नहीं म‍िला, लेकिन भाजपा को मुलायम के वोट का अहसान जरूर इस रूप में चुकाना चाहिए।

कांग्रेस मुक्‍त  अभियान को मिलेगा बल 

पीएम मोदी के सलाहकारों को आडवाणी की सलाह कुछ दूसरे कारणों से ज्‍यादा उपयोगी लगी। उन्‍हें लगा क‍ि मुलायम को राज्‍यपाल बना कर भाजपा देश को कांग्रेस मुक्‍त करने के अभियान में भी आगे बढ़ सकती है। कांग्रेस बि‍हार सरकार में मामूली साझेदार है। मुलायम को राज्‍यपाल बना कर राजद और कांग्रेस को नीतीश सरकार से अलग कराने की रणनीति पर भी सोचा जा रहा है। भाजपा को लग रहा है क‍ि मुलायम को राज्‍यपाल बना कर वह लालू-मुलायम के र‍िश्‍ते में भी दरार डलवाने में कामयाब रहेगी। बता दें क‍ि दोनों में पार‍िवार‍िक र‍िश्‍ता है। वे समधी हैं।

लालू यादव को भी लगी भाजपा की इस चाल की भनक

उधर, भाजपा की इस चाल की भनक राजद प्रमुख लालू यादव को भी लग गई है। उन्‍होंने बसपा प्रमुख मायावती पर डोरे फेंके हैं। उन्‍होंने उन्‍हें राज्‍यसभा भ‍िजवाने का भरोसा द‍िलाया है। खबर है क‍ि लालू कह रहे हैं क‍ि अगर मायावती राजद में आ जाएं तो उसके कोटे से राज्‍यसभा पहुंच सकती हैं। ऐसे में भाजपा और राजद खेमे अपने-अपने दांव चला रहे हैं, लेक‍िन माना जा रहा है क‍ि इसमें जो आगे न‍िकलेगा, फायदा उसी का होगा।

लालू कर रहे है अपने समधी को समझाने की हर संभव कोशिश 

लालू अपने समधी मुलायम को भी भाजपा की साज‍िश का श‍िकार नहीं होने की सलाह दे रहे हैं। बताया जा रहा है क‍ि उन्‍होंने मायावती के जर‍िए बसपा खेमे में मुलायम के करीब‍ियों से उन पर दबाव डलवाने की कोशिश की है। पहले तो लालू ने अपने दामाद को ही मुलायम को समझाने के ल‍िए कहा था, लेक‍िन दामाद में यह कह कर इनकार कर द‍िया कि जब से अख‍िलेश ने मुलायम से पार्टी छीनी है, तब से वह बेटे-पोते की कोई बात नहीं सुनते। इसके बाद लालू ने दूसरे व‍िकल्‍पों पर काम तेज कर द‍िया है। जो भी हो, आने वाले द‍िनों में ब‍िहार की राजनीत‍ि बेहद द‍िलचस्‍प होने वाली है।

(नोटः इस खबर का सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं है। यह खबर सिर्फ आपको हंसाने के लिए लिखी गई है।)

साभार -  jansatta

18 साल बाद पाकिस्तानी जेल से मिली रिहाई घर लौटकर सुना रहा है यातनाओं की दास्तान


18 साल बाद पाकिस्तानी जेल से मिली रिहाई, घर लौटकर सुना रहा है यातनाओं की दास्तान





आज से 18 साल पहले एक युवक पानी में बहकर पाकिस्तान के सीमा में प्रवेश कर गया था। जहां पाकिस्तानी पुलिस ने उसे हिंदुस्तान का खुफिया समझकर जेल में कैद कर लिया। पाकिस्तान की जेल में कैद युवक के परिवार वालों को इस बात की जानकारी नहीं थी। जहां मां-बाप अपने बेटे की खोज में दिन-रात भटकते रहे तो पत्नी घर में अपने पति का इंतजार कर रही थी।

18 साल बाद परिवार से मिला बेटा

देखते-देखते कई महीने और साल गुजर गए पर घर से गायब हुए बेटे का कोई अता-पता नहीं चला। तो मां-बाप को अपने बेटे की मौत हो जाने का अंदेशा सताने लगा। वहीं पत्नी ससुराल छोड़ मायके चली गई। मां-बाप काफी समय बीत जाने के बाद सुरेंद्र को भुलाते हुए अपने काम पर लग गए। फिर बेटे के गायब होने के लगभग 18 साल बाद सुरेंद्र के परिवार वालों को पंजाब पुलिस के द्वारा फोन पर ये जानकारी दी गई कि आपका बेटा हमारे पास है।

 एक फोन की बजी घंटी और मां का दिल खिल उठा 

पुलिस की जुबान से इस तरह की बात सुनने के बाद मां-बाप खुशी के मारे झूमने लगे और अपने बेटे से मिलने पंजाब पहुंचे।जहां 18 साल बाद अपने बेटे को सकुशल अपने सामने देख दोनों की आंखों से आंसू निकलने लगे। तो मां-बाप के गले लगकर बेटे ने 18 साल तक पाकिस्तान की जेल में कैद रहने और जिल्लत भरी जिंदगी जीने की दास्तां सुनाई। किस तरह पाकिस्तान की जेल में उसे प्रताड़ित किया जा रहा था।

सुनाई पाकिस्तानी जेल में सही यातनाएं

 जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान के जेल से 18 साल बाद बिहार के सारण जिले के जलालपुर का रहने वाला सुरेंद्र अपने पिता रामानुज महतो और मां तेतला देवी के सामने आजाद होकर पहुंचा और धोखे से पाकिस्तान जाने की बात बताई। सुरेंद्र ने कहा कि आज से 18 साल पहले राजस्थान के जैसलमेर की सीमा के पास नदी के रास्ते वो पाकिस्तान की सीमा में प्रवेश कर गया था। पाकिस्तान की सीमा में प्रवेश करने के बाद ना तो उसके पास पहचान पत्र था और ना ही कोई आइडेंटिटी कार्ड। जिससे पाकिस्तान पुलिस के द्वारा उसे हिंदुस्तानी खुफिया बताते हुए जेल में कैद कर लिया गया। जहां उससे जेल प्रशासन के द्वारा दिन भर खेतों में काम करवाया जाता था और तरह-तरह से प्रताड़ित किया जाता था।

 कांप उठता है सुरेंद्र का शरीर!

 प्रताड़ना ऐसी की आज भी सुरेंद्र का शरीर बोलने से कांप उठता है। तो जेल की दास्तां बताते हुए उसने कहा कि पाकिस्तान के उस जेल में आज भी कई हिंदुस्तानी कैद हैं। जिन पर पाकिस्तानी पुलिस के द्वारा ढेरों जुल्म किए जा रहे हैं। मैं तो खुसकिस्मत था जो पाकिस्तान की जेल से आजाद होकर अपने परिवार वालों के पास पहुंच गया। कुछ ऐसे भी हैं जो परिवार वालों को याद करते-करते ही मर गए। जेल से आजाद होने के बाद हमें इस्लामाबाद के भारतीय उच्चायुक्त भारत भूषण के पास पहचान पत्र बनाने के लिए ले जाया गया। जिसके बाद 76 मछुआरों के साथ हमें आजाद कर दिया गया।

क्या मायके से लौट आएगी 

पत्नी! पाकिस्तान की जेल से आजाद होने के बाद घर लौटा सुरेंद्र का परिवार बिल्कुल बिखर चुका था। जहां उसके मां-बाप उसकी याद में बीमार हो गए थे तो पत्नी घर छोड़कर अपने मायके चली गई थी। हालांकि मायके गई पत्नी ने अभी तक दुबारा शादी नहीं की थी। जिससे सुरेंद्र को ये उम्मीद है कि वो उसके साथ फिर घर आ जाएगी।

साभार-  oneindia

बिहार की इन दो बेटीयों ने साईकिल से ही पुरे देश का किया दौरा

बिहार की इन दो बेटीयों ने साईकिल से ही पुरे देश का किया दौरा



(सबिता महतो और तबशु अली )




कहते हैं कि बेटियां किसी भी मामले में बेटों से कम नहीं होती है वो हर काम को कर सकतीं हैं जो लड़के करते हैं. कुछ ऐसा ही कर गुजरने का हौसला जुनून और जज्बा के साथ बिहार की दो बेटी ने कर दिखाया है जिसकी तारीफ हर बिहारवासी कर रहा है.

बिहार की 2 बेटी अपने राज्य बिहार से पुरे देश के भ्रमण पर निकली थी वो भी साइकिल से और सभी राज्यों का दौरा करते हुए वापस अपने गृह राज्य बिहार पहुंच गई हैं. पूरे राज्य घूम कर दोनों कल घर पटना पहुंची जहां उनका जोरदार स्वागत किया गया. गौरतलब है कि दोनों ने अपनी यात्रा 27 जनवरी को शुरू की थी. साईकिल की सवारी करते हुए पुरे देश का चक्कर लगाकर कल 18 जुलाई 6 बजकर 5 मिनट पर दिघा सोनपुर स्थित जेपी पुल से पटना पहुंची. सबिता महतो जो छपरा की रहने वाली हैं तथा तबशु अली जमुई जिले के रहने वाली है दोनों यूनिटी ऑफ इंडियन कैडेट्स ( NCC ) के स्टूडेंट्स है.



साभार-Daily bihar News

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